मन, वचन और काया की शुभ प्रवृतियों से मानव जन्म को सफल करें

Vikram B Rathod
गांव – झाडोली
दिनांक -15 -7-2026
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर जी म. सा. आदि ठाणा 5 आज नाणा से विहार करते हुए झाडोली पधारे। श्री केसरिया आदिनाथ जैन -संघ झाडोली ने जैनाचार्य श्री का भाव-भरा हार्दिक स्वागत किया। धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य श्री ने कहा कि-
जैसे सांसद बनने के लिए चुनाव तो अनेक प्रतिनिधि लड़ते हैं परंतु सभी सांसद नहीं बनते हैं। सांसद बनने वाले भी सभी प्रधानमंत्री का पद प्राप्त नहीं कर सकते हैं ।
वैसे ही अनादि काल से चार गतियों में परिभ्रमण करने वाली हमारी आत्मा को मनुष्य जन्म की प्राप्ति होना अत्यंत दुर्लभ है । मनुष्य जन्म पाने के बाद भी जीवन में सद् धर्म की प्राप्ति एवं धर्म वचनों पर अटुट श्रद्धा होना और भी दुर्लभ है। मात्र पैसा कमाना, परिवार की जिम्मेदारियां को पूरी करना अथवा खाना-पीना और मौज-मजा करने में मनुष्य जीवन की सफलता नहीं है।मनुष्य जन्म की सच्ची सफलता तो धर्म के आचरण से हैं।

अधिकांश मनुष्यों के जीवन की 33% जिंदगी तो निद्रा में ही चली जाती है। साथ ही शरीर की कमजोरी के कारण विशेष धर्माचरण, त्याग ,तपश्चर्या आदि करना भी कठीन हैं । फिर भी हम अपने जीवन में यथाशक्ति मन ,वचन और काया की शुभ प्रवृत्तियों के माध्यम से धर्म का आचरण कर सकते हैं। जिसकी काया सशक्त है वह काया से भी धर्माचरण कर सकता है।
परंतु यदि काया सशक्त नहीं है तो मन से जगत् के कल्याण की शुभ भावना, पापों का पश्चाताप एवं सुकृतों की अनुमोदना तथा वचन से देव-गुरु की स्तवना ,सतसाहित्य का स्वाध्याय आदि शुभ प्रवर्तियों में अवश्य जुड़ना चाहिए। दिनांक -19 जुलाई को जैनाचार्य श्री का पिण्डवाड़ा नगर में चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश होगा।











