चेक अनादरण के 9 साल पुराने मामले में प्रभुलाल लोहार बरी

Prabhu Lal Lohar
न्यायालय ने सुनाया अहम फैसला, अधिवक्ता प्रताप तेली की प्रभावी पैरवी से मिली बड़ी राहत
भीलवाड़ा। वर्ष 2017 से चल रहे चेक अनादरण के मामले में प्रभुलाल लोहार को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) क्रमांक-05, भीलवाड़ा ने मेसर्स हिंदुजा बनाम प्रभुलाल प्रकरण में फैसला सुनाते हुए प्रभुलाल लोहार को आरोप से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। प्रकरण के अनुसार प्रभुलाल लोहार, पिता छीतर लाल लोहार, निवासी विजय सिंह पथिक नगर, भीलवाड़ा के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत मामला चल रहा था। मामले में लंबे समय तक न्यायालय में सुनवाई और दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत की गईं।

प्रताप तेली की पैरवी रही अहम
प्रभुलाल लोहार की ओर से अधिवक्ता प्रताप तेली ने मामले में प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष मजबूत पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों एवं दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने प्रभुलाल लोहार को मामले में दोषमुक्त घोषित करते हुए बरी कर दिया। न्यायालय के आदेश में पूर्व में प्रस्तुत जमानत मुचलके निरस्त किए जाने का भी उल्लेख है। साथ ही आदेश में कहा गया कि प्रकरण में अब कोई कार्यवाही शेष नहीं है तथा मामला फैसले के बाद रिकॉर्ड में दाखिल किया जाए।
लंबे समय बाद मिली बड़ी राहत
करीब नौ वर्ष से चले आ रहे मामले में न्यायालय के फैसले के बाद प्रभुलाल लोहार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। फैसला आने के बाद परिचितों एवं समर्थकों ने खुशी व्यक्त की। वहीं, मामले में प्रभावी पैरवी के लिए अधिवक्ता *प्रताप तेली* की भूमिका की चर्चा रही।
संवाददाता प्रभुलाल लोहार











