नियमित टीकाकरण को प्रभावी बनाने पर जोर, रानी में स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यशाला आयोजित

लूनिया टाइम्स संवाददाता भरत जीनगर रानी स्टेशन।
रानी स्टेशन। क्षेत्र में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंचायत समिति सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रतिनिधि डॉ. कीर्ति ने भाग लेकर टीकाकरण गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यशाला में टीकाकरण कवरेज, सत्रों की नियमितता, ड्यू लिस्ट प्रबंधन, ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान और छूटे हुए लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। समीक्षा के दौरान टीकाकरण सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और कार्यक्रम को अधिक परिणामोन्मुखी बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. कीर्ति ने कहा कि माइक्रोप्लान के प्रभावी क्रियान्वयन और फील्ड स्तर पर सतत मॉनिटरिंग से ही शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समय पर टीकाकरण सेवाएं पहुंचाने के लिए नियमित फॉलोअप और निगरानी बनाए रखने का आह्वान किया।
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओजस रावल ने कहा कि नियमित टीकाकरण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को कई गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में कोई भी पात्र बच्चा या गर्भवती महिला टीकाकरण से वंचित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने घर-घर संपर्क अभियान चलाकर ड्यू लिस्ट के अनुसार लाभार्थियों का फॉलोअप करने तथा छूटे हुए बच्चों एवं महिलाओं को चिन्हित कर समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहयोग और प्रभावी निगरानी के माध्यम से ही टीकाकरण कार्यक्रम के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यशाला में ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा प्रभारी, एलएचवी, एएनएम, आशा सहयोगिनी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को जनहितकारी, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीकाकरण सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाना रहा। अंत में स्वास्थ्यकर्मियों से टीकाकरण गतिविधियों को और अधिक सक्रियता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित करने का आह्वान किया गया।











