आर्य वीर दल के आत्म रक्षा एवं चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर में तीसरे दिन का प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मविश्वास से खिले बच्चों के चेहरे

Ghevarchand Arya
पाली रविवार 15 जून। महर्षि दयानन्द सरस्वती व्यायाम शाला लाखोटिया में चल रहे आत्मरक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन सर्वाग सुन्दर व्यायाम द्वितीय श्रेणी कटि नमन, कटि विकर्षण, गरूडोड्डीन, शिरोहस्तनति, कूर्दल ताल, नियुद्धम् के तहत संयुक्त मुष्ठी प्रहार, डबल बैलेंस पंच दोनो और से, व्याघ्रपद प्रहार (टाईगर क्लेप पंच)। दण्ड बैठक के तहत पार्श्व दण्ड, वृश्चिक दण्ड, हनुमान दण्ड, सिंह दण्ड पलट दण्ड। पदाघात किक के तहत पुर पदाघात (फ्रण्ट किक) पार्श्व पदाघात (साईड किक)। लाठी एवं तलवार संचालन के तहत सुरक्षा (ब्लाक) शत्रु से बचाव के लिए ऊर्ध्वदेश सुरक्षा (अपर ब्लाक) मध्यदेश सुरक्षा (मिडिल ब्लाक) के गुर सिखाए गये। सैनिक शिक्षा के तहत परेड के दोरान कदमताल मिलाते हुए सामने बाये दाहिने हाथ के संकेत से पंक्ति बनाना, सम्मुख एक पंक्ति बनाना आदि के अभ्यास करवाये गये। जिसको करते हुए बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास देखते ही बनता है
बौद्धिक शिक्षा के तहत वरिष्ठ रिटायर्ड शिक्षक गणपत भदोरिया अपने सम्बोधन में आर्य वीर दल का की व्याख्या करते हुए बताया कि आर्य का अर्थ श्रेष्ठ व्यक्ति होता है। वीर वह है जिसको देखकर शत्रु की कँपकपी छूट जावे उसे वीर कहते हैं। और दल का अर्थ तो आप जानते ही हैं ऐसे ही श्रेष्ठ वीरो का संगठन। आर्य वीर में बुद्धि और बल अर्थात ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों के गुणों का होना अनिवार्य है। आर्य समाज हमारी मातृ संस्था है। महर्षि स्वामी दयानन्द गुरु आचार्य और पितृ तुल्य पर प्रदर्शक है। रामप्रसाद बिस्मिल चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह ने दयानन्द को अपना गुरु मानकर राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ गये। हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि बच्चों की संख्या को देखते हुए आज दो वर्ग बनाएं गये जिसमें 5 से 12 वर्ष जुनियर और 13 से 25 वर्ष सिनियर के अलग-अलग बनाकर प्रशिक्षण दिया गया। जुनियर बच्चों को परम्परागत खेल का अभ्यास करवाया गया जैसे गोल घेरे में बैठकर पीठ पिछे रखें रूमाल लेकर रखने वाले का पिछा करना वह बैठ जावे तो चुपके से रूमाल दुसरे के पिछे रखना खेल का अभ्यास करवाया गया। जबकि सिनियर वर्ग को लाठी तलवार संचालन और शत्रु से बचाव के लिए दांव पेंच सिखाये गये। पश्चात संध्या समय दोनों वर्गों को 15 मिनट के लिए ध्यान एवं सध्या का अभ्यास करवाया गया।
शिविर संचालन में मुख्य शिक्षक जीवनलाल आर्य वीर के निर्देशन में सहायक शिक्षक हनुमान जांगिड़, दिव्यांश मेवाड़ा, सचिन कुमावत, सुनिल चारण, तनु आर्या सहयोग कर रहे हैं।
रिपोर्ट – घेवरचन्द आर्य पाली











