आर्य वीर दल शिविर में गुरू शिष्य परम्परा से अभ्यास करवाने से बच्चों का बढ़ रहा है उत्साह, इसलिए 8 बजें बाद भी लगती है कक्षा

Ghevarchand Arya
पाली आर्य वीर दल के आत्म रक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर में अनुशासन और मर्यादा का आलम यह है कि यहां शिक्षक द्वारा गुरू शिष्य परम्परा से अभ्यास करवाया जा रहा है जिससे बच्चों का सिखने और अभ्यास करने के प्रति उत्साह बढ़ रहा है।
शिविर की दिनचर्या इस प्रकार है।
प्रातः 5:30 बजे *ओ३म् आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामा राष्ट्रे राजन्यः शूर ऽइषव्यो ऽतिव्याधी महारथो………*. गान के साथ ध्वजारोहण 5:45 बजे वार्म अप शुक्ष्म क्रिया 6:00 बजे सर्वाग सुन्दर व्यायाम 6:15 बजे सूर्य नमस्कार 6:25 बजे भूमि नमस्कार 6:35 बजे नियुद्धम् 7:00 आसन प्राणायाम 7:30 बजे सेल्फ डिफेंस 7:45 बौद्धिक 8:00 जलपान इस प्रकार 2:30 घंटा अनवरत प्रशिक्षण चलता है। इसी प्रकार सायं कालीन सत्र मे आत्मरक्षार्थ नियुद्धम् के दांव-पेंच तथा लाठी, तलवार संचालन के अलग-अलग गुर तथा परम्पारिक खेल सिखाये जाते हैं। सायं 8:00 बजे जलपान के पश्चात पुनः ध्वजगान-
*ध्वजेयं मुदा वर्धते व्योमवातैः समुड्डीयमानान्तरिक्षे विशाले ।* *महामण्डले दीप्तदिव्यारुणाभे सुभासैर्रर्वेर्भासते-ओ३म् पताका।।* का गान कर ध्वज समेटकर सलामी देकर शान्तिपाठ और जयघोष के साथ शाखा समाप्त की जाती है।
प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि बच्चों का उत्साह इस कदर है कि रात्रि आठ बजे बाद भी अधिकांश बच्चे घर जाना नहीं चाहते। बच्चों के आग्रह पर शिक्षक जीवनलाल जी उनको 8:00 से 9:00 बजे तक लाठी और तलवार संचालन का अतिरिक्त अभ्यास करवाते है।

प्रशिक्षण में सहायक शिक्षक के रूप में वरिष्ठ आर्य वीर हनुमान जांगिड़, सुनिल चारण, तनु आर्या, सचिन कुमावत, सरदार निहाल सिंह आदि सहयोग कर रहे हैं।
शाखा में प्रत्येक आर्य वीर को अनुशासन के तहत यह सिखाया जाता है- मुस्कराते हुए आज्ञा पालन करना। निशंकोच कठोर परिश्रम करना। समय का पालन करना और मौन रहना, अगर बोलना ही है तो झूठ न बोलना, बहाने न बनाना। शाखा में आने वाले हर व्यक्ति को दोनों हाथ जोड़कर छाती पर रखते हुए झुककर अभिवादन (नमस्ते) करना।
आज छठे दिन बाक्सिग एसोसिएशन के कोच दिलीप गहलोत द्वारा बच्चों को बाक्सिग के बारे में मोटीवेशन देकर अभ्यास करवाया गया। महेश मोटर्स के मालिक अशोक पंवार द्वारा बच्चों को पाइनेपल ज्यूस पिलाया गया। बौद्धिक सत्र के तहत वरिष्ठ रिटायर्ड शिक्षक गणपत भदोरिया द्वारा नशे के अलग-अलग दुष्प्रभाव बताते हुए उससे दूर रहने की सिख देकर संकल्प करवाया गया।











