सभी तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है- शत्रुंजय महातीर्थं

Vikram B Rathod
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर जी म.सा. आदि ठाणा 5 आज मुण्डारा से विहार कर बाली नगर में पधारे। 9:00 बजे आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य श्री ने कहा कि-
आत्महित के लक्ष्य से किया हुआ त्याग ही सच्चा त्याग है। शरीर की स्वच्छता के लिए कोई व्यक्ति मनपसंद भोजन का त्याग करें, या पैदल 8 से 10 कि.मी. मॉर्निंग वॉक करें तो भी उसे कोई पुण्यबंध या कर्म का क्षय नहीं होता।
शरीर से भी आत्मा कीमती है ।शरीर के आरोग्य से भी आत्मा का आरोग्य पाना खूब जरूरी है। तीर्थ स्थानों की यात्रा करने से आत्मा के पापों की शुद्धि होती है ।

सभी तीर्थक्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ-शत्रुंजय महतीर्थं है।
अन्य तीर्थों पर जो कोई भी धर्म आराधना, त्याग ,तप या दान दिया जाता है उससे कई गुणा लाभ शत्रुंजय महातीर्थ पर आराधना करने से होता है।
प्रवचन के बाद चंदन भाई तेजराज जी राठौड के गृहांगण में श्री संघ के साथ गाजते- बजाते जैनाचार्य श्री के पगले हुए।
दिनांक 26 और 27 जून को जैनाचार्यश्री की स्थिरता श्री सर्वोदय पार्श्र्वनाथ आराधना भवन -फालना में होगी ।
प्रातः 9:00 बजे प्रेरणादायी प्रवचन होगा।











