सड़क नहीं, दलदल: कोलीखेड़ा मुख्य मार्ग पर बारिश के बाद बिगड़े हालात

प्रभुलाल लोहार
लाडले हनुमानजी मंदिर के पास कीचड़ और जलभराव से स्कूली बच्चों सहित हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित, ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और जल निकासी की मांग उठाई
माण्डल कस्बे में हुई बारिश ने विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी है। लाडले हनुमानजी मंदिर के पास स्थित कोलीखेड़ा मुख्य मार्ग बारिश के बाद पूरी तरह कीचड़ और जलभराव की चपेट में आ गया है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है, जिन्हें जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। कोलीखेड़ा मुख्य मार्ग माण्डल का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जहां से प्रतिदिन हजारों लोग पैदल, दोपहिया और चारपहिया वाहनों से आवागमन करते हैं। बारिश के बाद सड़क पर फैले कीचड़ के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसल रहे हैं, वहीं छोटे-छोटे स्कूली बच्चे यूनिफॉर्म और स्कूल बैग संभालते हुए किसी तरह इस दलदल जैसे रास्ते को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर जलभराव होने से लोगों को सड़क छोड़कर किनारों से निकलना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे बना नाला लंबे समय से गंदगी और मलबे से भरा हुआ है। नियमित सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था के अभाव में बारिश का पानी सड़क पर भर जाता है, जिससे पूरा मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई राहगीर फिसलकर घायल हो चुके हैं और हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। बारिश के हर मौसम में यही स्थिति बन जाती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कोलीखेड़ा मुख्य मार्ग की तत्काल मरम्मत कराई जाए, नाले की सफाई कर प्रभावी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि स्कूली बच्चों सहित आमजन को राहत मिल सके।
जनता का सवाल
जब इसी मार्ग से रोज़ हजारों लोग और क्षेत्र के स्कूली बच्चे गुजरते हैं, तो आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? क्या यह सड़क यूं ही दलदल बनी रहेगी या फिर लोगों को इस समस्या से स्थायी राहत मिलेगी?











