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जिला चिकित्सालय सोजत की चिकित्सकीय टीम ने समय पर पहचान, त्वरित उपचार और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कर बचाई मासूम की जान

भरत शर्मा


  • पाली, 22 जुलाई।

3 ग्राम हीमोग्लोबिन३ जिंदगी की जंग जीत गई नन्हीं मनीषा


कभी-कभी कुछ मिनटों में लिया गया सही निर्णय किसी की पूरी जिंदगी बदल देता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण जिला चिकित्सालय सोजत में देखने को मिला, जहां गंभीर एनीमिया (ैमअमतम ।दमउपं) से जूझ रही एक मासूम बच्ची को चिकित्सकों और नर्सिंग टीम की तत्परता, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं ने नया जीवन दिया।

सोजत जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ राजेश गुप्ता ने बताया कि 17 जुलाई 2026 को निजी अस्पताल से रेफर होकर आई 9 वर्षीय मनीषा पुत्री नारायण सिंह की हालत अत्यंत गंभीर थी। बच्ची अत्यधिक कमजोर और सुस्त थी, सांस लेने में कठिनाई हो रही थी तथा प्रथम दृष्टया गंभीर एनीमिया की आशंका दिखाई दी। चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए उसे तत्काल शिशु वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू किया। आवश्यक जांचें प्राथमिकता से कराई गईं, जिनमें बच्ची का हीमोग्लोबिन मात्र 3 ग्राम पाया गया। यह स्थिति जीवन के लिए बेहद जोखिमपूर्ण थी। ऐसे समय में ब्लड बैंक प्रभारी से तत्काल संपर्क कर, डोनर उपलब्ध नहीं होने के बावजूद चौरिटी (ब्ींतपजल) के माध्यम से शीघ्र रक्त की व्यवस्था की गई, जिससे बिना किसी विलंब के सुरक्षित रूप से रक्त चढ़ाया जा सका।

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चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ ने लगातार निगरानी, आवश्यक दवाइयों, पोषण संबंधी परामर्श और समर्पित उपचार के साथ बच्ची की स्थिति पर हर पल नजर रखी। सात दिनों के अथक प्रयासों का परिणाम यह रहा कि बच्ची की सेहत में लगातार सुधार हुआ और 22 जुलाई 2026 को डिस्चार्ज के समय उसका हीमोग्लोबिन बढ़कर 12 ग्राम हो चुका था। स्वस्थ होने के बाद आवश्यक परामर्श एवं फॉलोअप निर्देशों के साथ उसे घर भेज दिया गया। यह सफलता केवल चिकित्सकीय दक्षता की नहीं, बल्कि समय पर पहचान, त्वरित उपचार, सुरक्षित रक्त उपलब्धता, टीमवर्क, मानवीय संवेदनाओं और परिजनों के विश्वास की भी मिसाल है।

जिला चिकित्सालय सोजत ने एक बार फिर सिद्ध किया कि सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क और जीवनरक्षक उपचार पूरी संवेदनशीलता एवं समर्पण के साथ उपलब्ध कराया जाता है। इस उपचार में पीएमओ डॉ. राजेश कुमार के निर्देशन में डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. भवानी सिंह, नर्सिंग अधीक्षक ममता चौधरी तथा नर्सिंग टीम की ललिता, बोराराम, सुमित्रा एवं हसमत बानो ने टीम भावना, सूझबूझ और उत्कृष्ट समन्वय के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संदेश – बच्चों में गंभीर एनीमिया का समय पर निदान और उचित उपचार जीवन बचा सकता है। कमजोरी, अत्यधिक थकान, सांस फूलना या सुस्ती जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक, सुरक्षित रक्त की व्यवस्था और जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हैं। चिकित्सक का एक ही धर्मकृ सेवा ही परम धर्म।

Khushal Luniya

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