वरकाणा देवस्थान AGM : बैठक सफल, लेकिन प्रतिनिधित्व की खामोशी भविष्य के लिए खतरे की घंटी!

जेठमल बी. राठौड़ भायंदर
वरकाणा देवस्थान जैन पेढ़ी की AGM में एजेंडे के तमाम विषयों पर खुलकर चर्चा हुई और कुछ मुद्दों पर बहस तक पहुंचना इस बात का संकेत है. कि संस्था के सदस्य अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हैं। श्री रमेश कोठारी के अध्यक्षीय उद्बोधन
के बाद,तीर्थ लेखा-जोखा पेश हुआ और कुल जमा पूंजी में लगभग दोगुना इजाफा होना निश्चित रूप से पेढ़ी के आर्थिक प्रबंधन की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है। Celo चेयरपर्सन प्रदीप बादामिया की उपस्थिति ने भी सभा की गरिमा बढ़ाई। लेकिन किसी भी संस्था की सफलता का आकलन केवल उसके आर्थिक आंकड़ों या मंच पर मौजूद पदाधिकारियों से नहीं, बल्कि उन सदस्यों की भागीदारी से भी होना चाहिए जिनके नाम पर पूरी व्यवस्था खड़ी है।
और यहीं से AGM का सबसे बड़ा सवाल आता है—करीब 180 प्रतिनिधियों सदस्यों वाली संस्था में AGM के लिए लगभग 50 लोगो की मौजूदगी ही क्यों? इनमें करीब 20 ट्रस्टी होने का अर्थ यह हुआ कि ट्रस्ट मंडल की उपस्थिति लगभग पूरी रही, लेकिन गोड़वाड़ के गांवों से आने वाले प्रतिनिधियों की संख्या 30 से भी कम रही। यानी जिन गांवों और समाज के प्रतिनिधित्व के लिए यह व्यवस्था है, वहीं से अपेक्षित भागीदारी दिखाई नहीं दी। यह केवल उपस्थिति का आंकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य की प्रतिनिधित्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। क्या गांव अपने प्रतिनिधियों का चयन केवल परंपरा निभाने के लिए कर रहे हैं या उन्हें वास्तव में अपनी आवाज बनाकर भेज रहे हैं? और क्या चुने गए प्रतिनिधि AGM में उपस्थित होकर गांव के हितों, सवालों और सुझावों को मजबूती से सामने रख रहे हैं? इन सवालों से अब गांवों और प्रतिनिधियों—दोनों को बचने के बजाय जवाब तलाशना होगा।

संविधान की विवादित धाराओं पर चर्चा और संशोधित संविधान का प्रस्तुतीकरण AGM का सबसे महत्वपूर्ण भविष्यगत पहलू रहा। प्रतिनिधियों द्वारा सुझाव, आपत्तियां और सुधार सामने रखना निश्चित रूप से स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। लेकिन असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि इन चर्चाओं और सुझावों का परिणाम क्या निकलता है। AGM में बहस होना लोकतंत्र है, लेकिन बहस के बाद सही निर्णय और उसकी जवाबदेही ही संस्था की असली मजबूती है। कुल मिलाकर AGM प्रभावी रही, आर्थिक स्थिति में सुधार उत्साहजनक रहा और मुद्दों पर खुलकर चर्चा भी हुई; फिर भी कम प्रतिनिधि उपस्थिति ने एक ऐसी घंटी जरूर बजा दी है जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। वरकाणा देवस्थान पेढ़ी को मजबूत बनाना है तो केवल ट्रस्ट मंडल की सक्रियता पर्याप्त नहीं गोड़वाड़ के गांवों को भी अपने प्रतिनिधित्व को गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि खाली कुर्सियां भी कभी-कभी बहुत बड़ा सवाल पूछती हैं।











