हरियाली अमावस्या पर प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

Ghevarchand Arya
जांगिड़ समाज बंधुओं द्वारा विशेष पूजन एवं महाआरती, समाज की एकता की मिसाल
पाली 12 अगस्त बुधवार हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर प्रात 9 बजे से 11 बजें तक पाली के प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां जांगिड़ समाज बंधुओं द्वारा आयोजित विश्वकर्मा जी के विशेष पूजन एवं महाआरती में बड़ी संख्या में समाजजनों ने उपस्थित होकर सृष्टि रचयिता विश्वकर्मा प्रभू से सुख, समृद्धि और शिल्प-कला में उन्नति का आशीर्वाद मांगा। महाआरती से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पं प्रकाशचंद पिडवा द्वारा विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा का पूजन कराया और समाज की सुख-शांति के लिए मंगलकामना की गई। पूजन और महाआरती में बड़ी संख्या में बच्चों एवं बुजुर्गों ने भी भाग लिया।
प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि समाज अध्यक्ष मोहनराम जांगिड़ एवं महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जांगिड़ के निर्देशन तथा कोषाध्यक्ष अमरचंद शर्मा के नैतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में समाज पदाधिकारियों द्वारा भगवान विश्वकर्मा की भव्य महाआरती की गई। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर श्री विश्वकर्मा भगवान की जय” के नारों से गूंज उठा।

वरिष्ठ नागरिक एवं समाज कोषाध्यक्ष अमरचंद शर्मा ने कहा कि हरियाली अमावस्या प्रकृति और श्रम का पर्व है। भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के रचयिता और शिल्पकारों के आराध्य हैं। ऐसे आयोजन से नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। पूजन के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। समाज बंधुओ के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई जिसमें सभी समाज बंधुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समित के वर्तमान पदाधिकारियों समाज के पूर्व अध्यक्षों और नवयुवक मण्डल के पदाधिकारीयो एवं युवाओं ने सराहनीय सहयोग किया।
इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जांगिड़, वर्तमान पदाधिकारी अमरचंद शर्मा, शेषाराम पारखवड, ऋषिराज त्रिपाठी, एडवोकेट चन्द्रप्रकाश सिंघानिया, घेवरचन्द आर्य, राजेन्द्र जोपिग, अशोक किजा, जब्बरमल जोपिग, समाज के पूर्व अध्यक्ष चम्पालाल नागल, भूराराम छड़ियां, प्रकाश चन्द्र पिडवा, वयोवृद्ध वरिष्ठ नागरिक मदनलाल झालुडिंया, गंगाराम नागल, चम्पा लाल जेपालिया, राधाकिशन अठवासिया, नवयुवक मंडल के कालूराम बरड़वा, महेंद्र चवलेरा, जगदीश बरड़वा, रूपेश जोपिग, सुनील जोपिग, नारायणलाल झालुडिया मदनलाल वाणेचा सहित कई समाज बंधु मोजूद रहे।











