प्रशासनिक लापरवाही जलदाय विभाग और PWD के ‘ईगो’ में, फंसी सरूपगंज की जनता पुराना बस स्टैंड रोड पर आवागमन ठप

माधुराम प्रजापत
विकास के लंबे-चौड़े दावों के बीच सरूपगंज की जनता इन दिनों सरकारी महकमों की आपसी खींचतान और तानाशाही का दंश झेलने को मजबूर है। पुराना बस स्टैंड रोड का निर्माण कार्य पिछले लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। वजह किसी बजट की कमी नहीं, बल्कि जलदाय विभाग (PHED) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) का एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ना है। दो विभागों की इस ‘तू-तू, मैं-मैं’ में सड़क पूरी तरह ठप पड़ी है और आम जनता दो पाटों के बीच पिस रही है।
एक ने खोदी गली, दूसरे ने उखाड़ी सड़क
स्थानीय निवासियों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब विकास के नाम पर दोनों विभागों ने सड़क को नर्क बना दिया। एक तरफ जलदाय विभाग ने नया कनेक्शन देने और पाइपलाइन बिछाने के नाम पर गली के दोनों ओर गहरे गड्ढे खोदकर लावारिस छोड़ दिए। वहीं दूसरी तरफ, PWD के ठेकेदार ने रही-सही कसर पूरी करते हुए पूरी सड़क को उखाड़ फेंका हैं ।लंबा समय बीत जाने के बाद भी न तो पाइपलाइन का काम पूरा हुआ और न ही सड़क दोबारा बन सकी।

अहम’ की जंग में अटका विकास: दावों और बहानों का खेल
जलदाय विभाग की सफाई “हमने सड़क के दोनों तरफ नल और पाइपलाइन का काम करने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ रखी है।”
PWD का तर्क
“जब तक जलदाय विभाग पाइपलाइन का काम पूरी तरह खत्म नहीं कर लेता, तब तक नई सड़क का निर्माण शुरू करना मुमकिन नहीं है।”
दोनों विभागों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण मुख्य बाजार और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में धूल का गुबार, दुर्घटना का खतरा और व्यापार पूरी तरह चौपट हो चुका है। राहगीरों और वाहन चालकों के लिए इस मार्ग से निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है।
जनता का सवाल: कब टूटेगी अफसरों की नींद?
खुले पड़े गड्ढे आए दिन हादसों को न्योता दे रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर एक-दूसरे पर फाइलें खिसकाने में मस्त हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोनों विभागों ने समन्वय बनाकर सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।











