पद्मश्री विभूषित, गच्छाधिपति जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी म. का बेंगलुरु में हुआ भव्य नगर प्रवेश

जेठमल बी.राठौड़
- बेंगलुरु
20 वीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध धर्मगुरु , क्रांतिकारी , युगवीर , पंजाब केसरी प्रख्यात जैनाचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति तथा भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “पद्मश्री” से विभूषित , कल्याणक तीर्थोद्धारक , शांतिदूत परम पूज्य जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज साहब का 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बंगलोर में चातुर्मासार्थ पदार्पण हो रहा है । रविवार को उनका भव्य नगर प्रवेश कार्यक्रम तुमकूरु रोड़ स्थित नाहर विश्राम गृह में संपन्न हुआ। गत चातुर्मास नागौर (राजस्थान) में संपन्न कर संघ , शासन और समाजोपयोगी विभिन्न प्रकल्पों को संपन्न करवाते हुए करीब 2500 कि.मी. का सुदीर्घ पद विहार करते हुए राजस्थान, गुजरात , महाराष्ट्र के अनेक श्रीसंघों को धर्मलाभ देते हुए कर्नाटक पहुंचे है ।
वर्षों पश्चात् गुरुदेव के बेंगलुरु आगमन पर रविवार को नाहर विश्राम घर में नगर प्रवेशोत्सव का आयोजन रखा गया । इस अवसर पर बड़ी संख्या में आए शहर के विभिन्न श्रीसंघों के पदाधिकारियों व सैकड़ों गुरु भक्तों ने गुरुदेव की झलक पाकर अपने आप को धन्य महसूस किया । अनेक श्रीसंघों ने अपने अपने संघों में पधारने की विनती भी प्रस्तुत की ।
गुरुदेव के स्वागत में बैंड बाजों की धुनों और ढोल की थाप पर नाचकर गुरुभक्तों ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की । मंगल कलश धारण कर सौभाग्यवंती माताओं बहनों ने गुरुदेव का सामैया किया ।
धर्मसभा का प्रारंभ गुरुवंदना द्वारा हुआ और उसने बाद गच्छाधिपति आचार्य श्री के मधुर कंठ से मंगलाचरण से किया । आयोजक श्री मदन लाल नाहर परिवार ने पूज्य गुरुदेव को कांबली वोहराई । श्री प्रकाशचंद सिंघवी ने गुरु गुणगान किया । गोडवाड़ वल्लभ चातुर्मास आयोजक समिति के श्री कुमारपाल सिसोदिया ने उपस्थितजनों से 17 जुलाई को महावीर धर्मशाला वी वी पुरम में संक्रांति महोत्सव व 19 जुलाई को गोड़वाड़ जैन भवन में चातुर्मासार्थ प्रवेशोत्सव में पधारने का आमंत्रण दिया । उन्होंने बताया कि प्रवेश महोत्सव पर सम्मिलित होने के लिए देशभर से आने वाले 800 से ज्यादा मेहमानों की रुकने की व्यवस्था हो चुकी है । साथ ही अगर किसी आराधक की गोड़वाड़ भवन में 50 दिन रहकर चातुर्मास आराधना और तपस्या करने की भावना हो तो उनके लिए भी सब व्यवस्था रखी गई है ।

गच्छाधिपति गुरुदेव के शिष्य प्रखर वक्ता मुनि श्री मोक्षानंद विजय जी म. ने अपने उद्बोधन में कहा कि संत समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं । विलासिता और नशे की तरफ भटक रहे युवाओं को धर्म का सही मर्म बताकर उनकी ऊर्जा को देश , धर्म संस्कृति की रक्षा एवं जीवन निर्माण में लगाने हेतु संतों की प्रेरणा बहुत प्रभावशाली असर दिखाती है ।इस बार बेंगलुरु में गुरुदेव की निश्रा में जप , तप , आराधना के साथ साथ जैन समाज के कल्याण हेतु कुछ ठोस तथा रचनात्मक कार्य भी होंगे । साधर्मिक उत्कर्ष का स्वप्न लेकर गुरुदेव बेंगलुरु पधारें है जिसे हम सभी को मिलकर साकार करना है। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्मावलंबियों को पंथ , गच्छ , संप्रदाय की संकीर्णता से ऊपर उठकर भगवान महावीर के झंडे नीचे एक होना है । भले सब अपनी अपनी परम्पराओं का पालन करें किंतु भगवान महावीर के झंडे तले सब एक रहें । गुरुदेव वर्षों बाद आए हैं तो जो अहंकार का विसर्जन करके विनम्र बनेगा उस पर गुरु कृपा अवश्य बरसेगी। गोडवाड़ भवन ट्रस्ट समाज हित में गुरु वल्लभ के स्वप्नों को साकार कर रहा है ऐसे में गोडवाड़ भवन को वल्लभ तीर्थ की उपमा भी दी जा सकती है। चातुर्मास के दौरान मंगलकारी शत्रुंजय महातप की 4 अगस्त से सामूहिक आराधना भी होगी । जिसमें आराधकों को दो अट्ठम और सात छठ की तपस्या करनी होगी ।
गच्छाधिपति गुरुदेव ने फरमाया कि भक्त की भक्ति के वशीभूत होकर जैसे भगवान को आना पड़ता है वैसे ही मदन जी नाहर परिवार की समर्पित गुरुभक्ति ने हमें भी इनके विश्राम घर में आने के लिए विवश कर दिया । गुरुदेव ने बताया कि यद्यपि तेरापंथ धर्म संघ से जुड़ा हुआ ये एक अग्रणी और प्रतिष्ठित परिवार है लेकिन राजस्थान में इनके पैतृक गांव जानुंदा में प्राचीन जिन मंदिर का जीर्णोद्धार करवाकर नूतन दो मंजिला जिनमंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा करवाने का सौभाग्य मुझे मिला था और तब से मदन जी की सरलता और संतों के प्रति सच्ची निष्ठा के भाव ने मेरे दिल को जीत लिया था । इनकी भक्ति की शक्ति के कारण ही आज मेरा नगर प्रवेश आदि संस्कार धाम या पार्श्व लब्धि तीर्थ में न होकर नाहर विश्राम गृह में हुआ है । मंदिरमार्गी संतों का नगर प्रवेश तेरापंथ धर्म संघ के अग्रणी श्रावक के यहां होना ये भी सांप्रदायिक एकता की मिसाल बना है । समाज कल्याण और साधार्मिकों के उत्कर्ष के 23 साल पहले के मेरे अधूरे रहे सपने को पूरा करने मैं बेंगलुरु आया हूं । मुझे पूर्ण विश्वास है गोड़वाड़ जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में मेरा सपना शीघ्र साकार होगा । गुरुदेव ने पधारे हुए सभी संघों और गुरुभक्तों की विनती को सम्मान देते हुए फरमाया कि वे समय की अनुकूलता के अनुसार सभी की भावनाओं को पूरा करने का प्रयास करेंगे ।
संगीतकार कमलेश भाई ने अपनी मधुर संगीत की स्वर लहरियों से वातावरण को भक्तिमय बनाया ।
रौनक नाहर ने पधारे हुए सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए सभी को प्रीति भोज के लिए आमंत्रित किया ।
13 जुलाई को गुरुदेव पार्श्व लब्धि धाम , 14 को टी दासरहल्ली , 15 को राजाजी नगर संघ में और 16 को शांतिनगर जैन स्थानक भवन पधारेंगे । जहां गुरूदेव का भव्य प्रवेश और प्रवचन आदि कार्यक्रम आयोजित होगा ।
गुरु कृपा चातुर्मास के दौरान सभी आराधक अवश्य ही गोड़वाड़ जैन भवन में गुरुदेव के सान्निध्य का लाभ प्राप्त करें ।











