जब उम्मीदें टूटने लगीं… तब जनाना चिकित्सालय सादड़ी की टीम बनी जीवनरक्षक

भरत शर्मा
हाई रिस्क गर्भवती की सुरक्षित डिलीवरी, मां और नवजात दोनों सुरक्षित
पाली जिले के राजकीय जनाना चिकित्सालय सादड़ी में एक ऐसा पल आया, जब लेबर रूम के भीतर जीवन बचाने की जंग चल रही थी और बाहर खड़े परिजनों की आंखों में चिंता, डर और दुआएं एक साथ दिखाई दे रही थीं। हर गुजरता पल भारी लग रहा था, क्योंकि 25 वर्षीय कुसुम कुमारी, पत्नी ललित मेघवाल, निवासी गुड़ा कल्याण सिंह, अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंची थीं।
गर्भवती का रक्तचाप 220/118 तक पहुंच चुका था और पूरे शरीर में अत्यधिक सूजन थी। यह स्थिति मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण थी। चिकित्सकों ने तुरंत इसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी घोषित करते हुए बिना समय गंवाए उपचार और सुरक्षित प्रसव की तैयारी शुरू कर दी। राजकीय जनाना चिकित्सालय सादड़ी के डॉ. राजेंद्र पुनमिया ने पूरी जिम्मेदारी संभालते हुए अपनी अनुभवी टीम के साथ सूझबूझ, त्वरित निर्णय और बेहतर चिकित्सकीय कौशल का परिचय दिया।

लेबर रूम में हर सदस्य पूरी एकाग्रता और समर्पण के साथ अपने दायित्व निभा रहा था। इस चुनौतीपूर्ण प्रसव को सफल बनाने में नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा भाटी, पुष्पा पालीवाल, भरत सोलंकी, दिव्येश पाल सिंह, संतोष, भूमिका, अतुल जैन, दीपिका तथा सफाई कर्मचारी प्यारी बाई ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी के समन्वित प्रयासों से आखिरकार वह क्षण आया, जब सुरक्षित प्रसव संपन्न हुआ और मां तथा नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहे। लेबर रूम के बाहर खड़े परिजन लगातार भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। जैसे ही चिकित्सकीय टीम ने बाहर आकर मुस्कुराते हुए बताया कि “मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं,” वैसे ही चिंता से भरे चेहरों पर राहत की मुस्कान लौट आई। खुशी के आंसू छलक पड़े और परिवार के सदस्यों ने भावुक होकर चिकित्सकों एवं समस्त स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त किया।
यह सफलता केवल एक सुरक्षित डिलीवरी नहीं थी, बल्कि समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय, टीमवर्क, संवेदनशीलता और समर्पण का जीवंत उदाहरण भी बनी। जनाना चिकित्सालय सादड़ी की टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कठिन से कठिन हाई रिस्क गर्भावस्था में भी यदि समय पर विशेषज्ञ उपचार और समन्वित प्रयास मिलें, तो सुरक्षित मातृत्व का सपना साकार किया जा सकता है पाली सीएमएचओ डॉ विकास मारवाल ने बताया कि यह कहानी केवल एक मां और नवजात की सुरक्षा की नहीं, बल्कि उन स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण की भी है, जो हर दिन अनगिनत परिवारों की उम्मीदों की रक्षा के लिए निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं।











