सूर्या’ परियोजना : CRZ अनुमति से जुड़ी बाधा को मिली कानूनी मंजूरी,अब बहाने नहीं, काम की रफ्तार चाहिए

जेठमल बी. राठौड़
मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा मीरा-भायंदर की महत्वाकांक्षी ‘सूर्या’ पेयजल परियोजना के लिए आवश्यक सीआरजेड (CRZ) अनुमति से जुड़ी बाधा को दूर किए जाने के बाद परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। यह निर्णय वर्षों से जल संकट झेल रहे मीरा-भायंदर और वसई-विरार के लाखों नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। अब परियोजना के अधूरे कार्यों, विशेषकर विद्युत लाइनों और अन्य आवश्यक अधोसंरचना के निर्माण में तेजी आने की संभावना है, जिससे भविष्य में शहरों की पेयजल व्यवस्था अधिक मजबूत हो सकेगी। हालांकि, केवल न्यायालय की मंजूरी मिल जाना ही समाधान नहीं है। वास्तविक चुनौती अब परियोजना को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने की है।

वर्षों की देरी, प्रशासनिक अड़चनें और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को पीछे धकेला है। इसलिए संबंधित एजेंसियों और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे अब किसी नई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा का बहाना बनाए बिना कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करें। ‘सूर्या’ परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि क्षेत्र के लाखों नागरिकों के जीवन स्तर से जुड़ा विषय है। न्यायालय का निर्णय निश्चित रूप से सकारात्मक और स्वागतयोग्य है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब लोगों के घरों तक नियमित और पर्याप्त पेयजल पहुंचे। जनता अब घोषणाओं और मंजूरियों से आगे बढ़कर जमीन पर परिणाम देखना चाहती है। इसलिए प्रशासन, परियोजना से जुड़ी कंपनियों और जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय परियोजना को शीघ्र पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।











