15 की आयु का दिवास्वप्न 50 वर्ष बाद साकार , प्राचीन कोटनाथ महादेव को भेंट किया भव्य प्रवेशद्वार

घेवरचन्द आर्य
मेड़ता सिटी कृष्ण भक्ति के लिए विख्यात मीराबाई की तपस्थली मेड़ता में अपने पूर्वज पितरों की स्मृति को चिरस्थाई बनाने का वर्षो पुराना संकल्प सोमवार को उस समय साकार हुआ जब विष्णु सागर स्थित प्राचीन श्री कोटनाथ महादेव मंदिर में रामरतन जांगिड़ दुगेसर परिवार द्वारा निर्मित भव्य प्रवेशद्वार का लोकार्पण सातालावास शनिधाम के प्रमुख गादीपति महंत अशोकनाथ जी महाराज एवं संतों के सानिध्य में सम्पन्न हुआ ।
भामाशाह परिवार के रामरतन जांगिड़ ने बताया कि बचपन मे जब वे किसी को अपने पूर्वजों की याद में प्रवेशद्वार का लोकार्पण करते देखते थे, तब से ही उनके मन में इच्छा थी कि वे भी बड़े होकर अपने पितरों की याद में समाज को ऐसा द्वार भेंट करेंगे। उनका यह संकल्प 3 अगस्त को श्रावण के प्रथम सोमवार के पावन दिन पूर्ण हुआ। अपने पिता के संकल्प को साकार रूप देने में उनके पुत्र मनोज जांगिड़, विनोद जांगिड़ एवं पौत्र रियाशं जांगिड़ का सहयोग रहा जिन्होंने भव्य प्रवेशद्वार का निर्माण करवाकर उसे श्री कोटनाथ महादेव को समर्पित किया।

इस अवसर पर रामरतन जांगिड़ दुगेसर परिवार द्वारा गुरू दक्षिणा के रूप में एक हस्त-निर्मित प्याला (खप्पर) श्रीफल और शाल श्री श्री 1008 महन्त अशोकनाथ जी महाराज भेंट की गई। जिसको गुरूजी ने सहज स्वीकार कर शिष्यों के पीठ पर थपकी देकर मुक्तकंठ से आर्शीवाद दिया। मंदिर कमेटी द्वारा प्रवेशद्वार के लाभार्थी परिवार का सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी का आयोजन भी किया गया। जिसमें शहर की धर्मप्रेमी जनता और श्रद्धालुओ की भीड़ उमडती नजर आई। इस अवसर पर साधु-संतों के अलावा शहर के गणमान्य लोग एवं भक्तजन मोजूद रहे।











