200 से अधिक युवाओं ने लिया भाग, विद्यार्थियों ने शिक्षा, पारंपरिक ज्ञान, काउंसलिंग और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे

Monu Suresh Chhipa
बारहठ महाविद्यालय में युवा संवाद कार्यक्रम सम्पन्न
शाहपुरा, 10 अगस्त 2026। बारहठ महाविद्यालय में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत कार्यवाह डॉ. शंकर लाल माली रहे। मुख्य अतिथि डॉ. पुष्करराज मीणा, प्राचार्य एवं जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, भीलवाड़ा तथा नगर संघचालक शाहपुरा कन्हैया लाल की उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे एवं भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर सामूहिक वंदे मातरम् के साथ हुआ।
सहअस्तित्व भारतीय संस्कृति का मूल आधार
युवाओं से संवाद करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. शंकर लाल माली ने कहा कि भारत राष्ट्र प्रारंभ से ही सहअस्तित्व के विचार को स्वीकार करता आया है। जिस प्रकार जड़ और चेतन का सहअस्तित्व है, उसी प्रकार भारतीय समाज की विभिन्न पीढ़ियां भी आपसी संवाद के माध्यम से आगे बढ़ती रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत केवल साम्राज्यवाद में विश्वास करने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का विचार लेकर चलने वाली संस्कृति है। भारतीय परंपरा में मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर और सीता-राम जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को सदैव सम्मानजनक स्थान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं सामाजिक मूल्यों के संवर्धन का कार्य करती रही हैं। वेद, पुराण और गीता जैसे ग्रंथ जीवन जीने का मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
तक्षशिला और नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों का किया उल्लेख
डॉ. माली ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। तक्षशिला, नालंदा और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालय विश्व प्रसिद्ध रहे हैं, जहां अनेक विदेशी विद्वानों ने अध्ययन किया। इसके प्रमाण विभिन्न विदेशी ग्रंथों में भी मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘अतिथि देवो भवः’ भारतीय जीवन संस्कारों में सदैव से सम्मिलित रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भ्रामक विमर्श से सचेत रहने की अपील
मुख्य वक्ता ने युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जाने वाले भ्रामक एवं दूषित विमर्श से सचेत रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी विषय पर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों को समझने और तर्कशील सोच विकसित करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है और युवा शक्ति ही इसे गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने का आह्वान
डॉ. माली ने युवाओं से अपनी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन अथवा उग्र आंदोलन से एक ओर राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक एवं राजनीतिक वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक संवाद और विचार-विमर्श आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें युवा संवाद कार्यक्रम भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल
कार्यक्रम के दौरान अनेक विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने सवाल किया कि पारंपरिक ज्ञान को पाठ्य सामग्री का हिस्सा क्यों नहीं बनाया जा रहा है? वहीं स्कूलों एवं महाविद्यालयों में काउंसलिंग की व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न किए गए। विद्यार्थियों ने कहा कि युवा अवस्था में मार्गदर्शन एवं काउंसलिंग की विशेष आवश्यकता होती है।
इसी प्रकार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं एवं भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू किए जाने को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए।
मुख्य अतिथि डॉ. पुष्करराज मीणा ने युवा संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिकों सहित 200 से अधिक युवाओं एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।











