जिंदल के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
रोजगार, मुआवजा और गोचर भूमि संरक्षण की मांग; समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भीलवाड़ा/सुरास, संवाददाता प्रभुलाल लोहार। जिंदल एसए लिमिटेड के खिलाफ सुरास और ठेड़वास क्षेत्र के ग्रामीणों का लंबे समय से पनप रहा आक्रोश मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने रोजगार, मुआवजा, गोचर भूमि संरक्षण तथा मूलभूत सुविधाओं सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पारंसल की डांग (पीकेडी) में विशाल धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, किसान और पशुपालक मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में संचालित खनन गतिविधियों और ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं पर न तो कंपनी ध्यान दे रही है और न ही प्रशासन प्रभावी कार्रवाई कर रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर करोड़ों रुपये का व्यवसाय कर रही है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मामले में उपेक्षा बरती जा रही है। बेरोजगार युवा लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके अलावा खनन और ब्लास्टिंग से प्रभावित किसानों तथा पशुपालकों को भी उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र की गोचर भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे पशुपालकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने मांग की कि गोचर भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा क्षेत्र के विकास के लिए कंपनी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करे।
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का भी अभाव है। ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय तथा विद्यालयों में व्याप्त समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। साथ ही डिग्रीधारी युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार देने और स्थानीय लोगों को वर्क ऑर्डर एवं ठेकों में प्राथमिकता देने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल रोजगार का नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास, किसानों के अधिकारों, पशुपालकों के हितों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
धरने में उठाई गई प्रमुख मांगें
- गोचर भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले।
- स्थानीय लोगों को वर्क ऑर्डर और ठेकों में प्राथमिकता दी जाए।
- ब्लास्टिंग से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
- प्रभावित किसानों को राहत एवं सहायता प्रदान की जाए।
- ग्राम पंचायत क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की जाए।
- पशु चिकित्सालय खोला जाए।
- डिग्रीधारी युवाओं को योग्यता अनुसार रोजगार मिले।
- विद्यालयों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
- मजदूरों की विभिन्न समस्याओं का निस्तारण किया जाए।
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।













