किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और देश की आयात निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी : शंकर ठक्कर

ललित दवे
मुंबई- अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया खरीफ सीजन 2026-27 की बुवाई शुरू होने से पहले किसानों को सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के दाम पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर मिल रहे है। इसके चलते कई राज्यों के किसान इस बार इन फसलों की खेती बढ़ाने की तैयारी में जुट गए हैं। बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद किसानों का उत्साह बढ़ा रही है और तिलहन खेती को नई रफ्तार मिल सकती है।
सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए मौजूदा बाजार भाव काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून 2026 को इंदौर मंडी में सोयाबीन का भाव करीब 68,000 रुपये प्रति टन पहुंच गया है। जो पिछले साल इसी समय इसकी कीमत लगभग 43,396 रुपये प्रति टन थी। सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मौजूदा बाजार भाव एमएसपी से अधिक होने के कारण किसानों को फसल बेचने पर बेहतर लाभ मिलने की संभावना बन रही है।
दूसरी तरफ मूंगफली उगाने वाले किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में 5 जून तक मूंगफली का भाव करीब 72,000 रुपये प्रति टन पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह लगभग 53,720 रुपये प्रति टन था। हालांकि मौजूदा कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आसपास है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले कीमतों में आई इस बढ़ोतरी से किसानों का उत्साह बढ़ा है। बेहतर दाम मिलने की उम्मीद को देखते हुए कई किसान इस बार मूंगफली की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे आने वाले सीजन में मूंगफली की बुवाई बढ़ सकती है।
देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में सोयाबीन की खेती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। कर्नाटक के कई जिलों में बुवाई शुरू हो चुकी है और किसानों के बीच बीज खरीदने की मांग तेजी से बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून सामान्य रहता है तो इस बार सोयाबीन उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
गुजरात में मूंगफली की खेती को लेकर किसानों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग के अनुसार 8 जून तक राज्य में 55,788 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 31,110 हेक्टेयर था। यह बढ़ोतरी बताती है कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद किसानों को तिलहन फसलों की ओर आकर्षित कर रही है।
तिलहन फसलों के बेहतर बाजार भाव का असर सूरजमुखी की खेती पर भी पड़ सकता है। सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी 8,343 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इससे किसानों को न्यूनतम मूल्य का भरोसा मिलेगा और वे इस फसल की खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तिलहन फसलों का रकबा बढ़ता है तो इससे देश में खाद्य तेल उत्पादन में सुधार होगा।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा भारत खाद्य तेलों के आयात पर बड़ी मात्रा में निर्भर है। भारत की खपत का 60 से लेकर 65% तक तेल आयात करना पड़ता है। ऐसे में अगर किसान अधिक क्षेत्र में सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों की खेती करते हैं, तो घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और देश की आयात निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, बेहतर बाजार भाव और सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य एवं फसल बढ़ाने के लिए शुरू की गई योजनाओं ने तिलहन फसलों के प्रति किसानों का भरोसा बढ़ाया है। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो खरीफ सीजन 2026-27 तिलहन किसानों एवं देश के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।













