बिजली व्यवस्था बेपटरी, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बार-बार बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण, रखरखाव के दावों पर उठे सवाल

भीलवाड़ा, बागोर| लूनिया टाइम्स संवाददाता – प्रभुलाल लोहार
बागोर फीडर से जुड़े बावलास, अड़सीपुरा, कापड़िया माता मगरी सहित आसपास के कई गांवों में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग द्वारा समय-समय पर रखरखाव और बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए बिजली बंद रखने की सूचना दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में बिजली व्यवस्था में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मामूली फॉल्ट होने पर भी घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है, जिससे आमजन, किसान, विद्यार्थी और छोटे व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी और उमस के इस मौसम में लगातार बिजली कटौती लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि बागोर से बावलास तक गुजरने वाली 11 केवी विद्युत लाइन के कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां आज भी बिजली तारों के बेहद करीब हैं। तेज हवा, आंधी या बारिश के दौरान यही टहनियां बिजली लाइनों से टकराकर फॉल्ट का कारण बनती हैं, जिससे बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष रखरखाव, लाइन सुधार और पेड़ों की छंटाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आती है। यदि समय रहते विद्युत लाइनों के आसपास उगी टहनियों की नियमित छंटाई और आवश्यक मरम्मत कार्य कराए जाएं तो क्षेत्र में बार-बार होने वाली बिजली कटौती की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
हादसे की आशंका भी बरकरार
ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह बिजली के तार पेड़ों की शाखाओं के बीच से गुजर रहे हैं, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका भी बनी रहती है। आगामी मानसून को देखते हुए ग्रामीणों ने इसे गंभीर सुरक्षा मुद्दा बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब हर साल रखरखाव और लाइन सुधार के लिए बजट खर्च किया जाता है, तो फिर क्षेत्र में बार-बार बिजली बाधित होने और लाइनों के आसपास पेड़ों की टहनियां बने रहने जैसी समस्याएं आखिर क्यों बनी हुई हैं। यही सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।













