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राजस्थान में आज से ओबीसी का महा-सर्वे; 51 हजार कर्मचारी ‘राजधरा ऐप’ से घर-घर पूछेंगे 19 तीखे सवाल

सत्यनारायण सेन गुरला


जयपुर: राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए आज, 10 जुलाई 2026 से राज्य का सबसे बड़ा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) डिजिटल सर्वे शुरू हो गया है। राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा कराया जा रहा यह सर्वे 23 जुलाई 2026 तक चलेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 51,168 प्रगणकों (कर्मचारियों) की विशाल फौज को मैदान में उतारा है, जो पूरी तरह पेपरलेस तकनीक से डाटा जुटाएंगे

‘राजधरा ऐप’ से डिजिटल एंट्री, हर कर्मचारी को 300 घरों का जिम्मा

यह पूरा सर्वे पूरी तरह से ऑनलाइन और हाईटेक मोड में आयोजित किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए ‘राजधरा सर्वे मोबाइल ऐप’ के जरिए कर्मचारियों को मौके पर ही डाटा फीड करना होगा। फील्ड में तैनात प्रत्येक प्रगणक को औसतन 250 से 300 घरों के सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ये हैं वो ’19 सवाल’ जो तय करेंगे राजनीतिक भविष्य
आयोग ने सर्वे के लिए दो तरह के फॉर्म (पंचायती राज और शहरी निकाय) तैयार किए हैं, जिनमें कुल 19 सवाल शामिल हैं। इनमें से प्रमुख सवाल परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि को खंगालेंगे:क्या परिवार का कोई सदस्य पूर्व या वर्तमान में MP, MLA या राज्यसभा सदस्य रहा है?स्थानीय स्तर पर सरपंच, वार्ड पंच, प्रधान, जिला परिषद सदस्य या मेयर/पार्षद के पद पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की क्या स्थिति है?परिवार की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति कैसी है?

क्यों खास है यह सर्वे और क्या होगा इसका असर?
आरक्षण का नया कोटा: सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ के दिशा-निर्देशों के तहत, इस वैज्ञानिक सर्वे से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर ही आगामी चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण तय होगा।चुनावों में होगी देरी: पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट ने जुलाई अंत तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब अगस्त के दूसरे सप्ताह में आयोग द्वारा अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों का एलान करेगा।

तबादलों पर रोक की मांग: सर्वे की गंभीरता को देखते हुए आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि राज्य में तबादलों पर से बैन हटने के बावजूद, सर्वे कार्य में लगे 51 हजार से अधिक कर्मचारियों को 23 जुलाई तक उनके वर्तमान स्थान से रिलीव न किया जाए, ताकि डेटा संकलन के काम में कोई बाधा या देरी न आए।

Khushal Luniya

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