“संसार में कुछ भी आश्चर्यकारी नहीं है”

विक्रम बी राठोड
स्थान – पिंडवाड़ा
दिनांक -05/06/26
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म. सा. ने श्री प्रेम सूरि गुरु मंदिर – आराधना भवन – पिंडवाड़ा में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि-
जीवन में जो कुछ भी अनुकूलताएँ प्राप्त होती हैं वह पुण्य को आभारी हैं। एवं जो कुछ भी प्रतिकूलताएँ आती हैं वह पाप के कारण हैं।जब पुण्य का साथ हो तब वैरी भी प्रिय बन जाता है और शत्रु भी मित्र बन जाता है। सारी दुनिया विरोधी बनने पर भी पुण्य के साथ होने से कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है। कहा भी है – ” बाल न बाँका करी सके जो जग वैरी होय।”
परंतु जब पुण्य का साथ छूट जाता है और पापोदय प्रकट होता है तब अपना ही व्यक्ति हमें धोखा देकर यावत् हत्या करने के लिए भी तैयार हो जाता है।

अत्यंत ही निकट रहे व्यक्ति पर हर व्यक्ति आँख मूँद कर विश्वास करता है। पुण्य के साथ होने पर सामने वाला व्यक्ति भी पूरी तरह से उसका विश्वास-पात्र बनता है। परंतु पुण्य के करवट बदलने के बाद अत्यंत विश्वास पात्र व्यक्ति भी धोखा देने के लिए तैयार हो जाता है।
प्रतिदिन ऐसी अनेक घटनाएँ बनती हैं जिनमें रक्षक भी भक्षक बन जाता है, अंगरक्षक भी हत्यारा बन जाता है। पिता की हत्या उसी का पुत्र करने के लिए तैयार हो जाता है। पत्नी, पति से बेवफा हो जाती है।
इस संसार में कुछ भी आश्चर्यकारी नहीं है। संसार में एक पल का भी विश्वास नहीं कर सकते हैं। अतः पापों का क्षय करते हुए पुण्यवृद्धि के लिए प्रयत्नशील बनना चाहिए।
प्रतिदिन प्रातः 9:45 बजे प्रेरणादायी प्रवचन होगी।











