नाबालिग बेटी को दस्तयाब करने में पुलिस की लापरवाही, पीड़ित एसटी महिला पहुंची पुलिस अधीक्षक के द्वार

Ghevarchand Arya
पाली 13 जुलाई अपनी नाबालिग पुत्री को वापस लाने के लिए एक गरीब अनुसूचित जनजाति की महिला ने पुलिस अधीक्षक पाली के नाम ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई है। बताया जाता है कि ढाई महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस थाना सांडेराव द्वारा उसकी नाबालिग बेटी को दस्तयाब करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। उगीयां देवी पत्नी धर्माराम (40) जाति सरगरा, जाखा नगर, तहसील सुमेरपुर ने दिए ज्ञापन में बताया कि उसकी नाबालिग पुत्री को 5 मई दोपहर 2.30 बजे करण पुत्र शंकरलाल व अन्य बहला-फुसलाकर भगा ले गए। इस संबंध में सांडेराव थाने में एफआईआर 72/2026, धारा 137 (2) भारतीय न्याय संहिता दर्ज है।

पीड़िता ने बताया कि वह ढाई महीने से थाने के करीब 50 चक्कर काट चुकी है। एफ आर आई में आरोपीयों के नाम होने के बावजूद पुलिस गहनता से कार्यवाही नहीं कर रही है। महिला ने बताया कि उसने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में डीबी हबेअस कार्पस 373/2026 दायर की जिसमें माननीय न्यायालय ने 16 जुलाई को नाबालिग को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बेटी की मां ने आशंका जताई कि नाबालिग के साथ जबरन शादी, शारीरिक शोषण और लैंगिक अपराध भी किया जा सकता है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि विशेष टीम गठित कर जल्द से जल्द उसकी बेटी को दस्तयाब कर 16 जुलाई तक कोर्ट में पेश किया जाए।











