स्वच्छ मतदाता सूची की पहल या बढ़ती आशंकाएँ? SIR पर भरोसा भी, सवाल भी

जेठमल बी राठौड़
- मुंबई
महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों में चल रहा या हो चुके स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक शुद्ध,अद्यतन और पारदर्शी बनाने का प्रयास है। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट एवं अपात्र नामों को हटाकर प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) द्वारा घर-घर सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया इसी दिशा में एक प्रशासनिक पहल है, जिससे आगामी चुनावों की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को मजबूत किया जा सके।

दूसरी ओर, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर आशंकाएँ भी सामने आईं। विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और अनेक नागरिकों ने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ों की कमी, सीमित समय, तकनीकी त्रुटियों तथा BLO की कार्यप्रणाली में कमियों के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा पैदा हो सकता है। इन मुद्दों पर अदालतों का दरवाज़ा भी खटखटाया गया। हालांकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि SIR का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार और निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी को स्वीकार किया, फिर भी यह स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और विधिसम्मत ढंग से लागू होना आवश्यक है।
मिरा-भाईंदर महानगरपालिका क्षेत्र में भी SIR अभियान प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक पात्र मतदाता तक सही जानकारी और सहायता पहुँचे, वहीं नागरिकों का दायित्व है कि वे सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें और अपने दस्तावेज़ समय पर उपलब्ध कराएँ। लोकतंत्र की मजबूती केवल स्वच्छ मतदाता सूची से ही नहीं, बल्कि इस विश्वास से भी आती है कि एक भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो। इसलिए SIR की सफलता केवल आँकड़ों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जनविश्वास और निष्पक्ष क्रियान्वयन से तय होगी।











