आर्य वीर दल के आत्मरक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर के 12 वे दिन बच्चों ने सिखे जिम्नास्टिक के गुर

Ghevarchand Arya
पाली 24 जून आर्य समाज और आर्य वीर दल पाली के आत्मरक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर में मंगलवार को 12 वे दिन शिक्षक जीवनलाल आर्य द्वारा परेड़, वार्मअप, सर्वाग सुन्दर, सुर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, चन्द्र नमस्कार तथा दण्ड बैठक एवं तलवार – लाठी संचालन और लेजियम, नियुद्धम का प्रशिक्षण दिया गया। जबकि जिम्नास्टिक कोच भंवर गोरी द्वारा जिम्नास्टिक के गुर बताकर अभ्यास करवाया गया।


बौद्धिक सत्र के तहत आर्य वीर दल सचिव हनुमान आर्य द्वारा सैनिक की विधवा मां की व्यथा पर- वदन करो उस मां को, जो हर मां से बड़ी थी। कविता सुनाकर सैनिक के विधवा मां की महिमा बताई गई। शिविर में प्रशिक्षणरत आर्य विरांगना रिद्धि आर्या (13) द्वारा जीवन के महत्व पर – बचपन निकल गयो, जवानी चली गई। ज़िन्दगी री किमती निशानी चली गयी। भजन सुनाकर दर्शकों से तालीयां बटोरी। वरिष्ठ रिटायर्ड शिक्षक गणपत भदोरिया द्वारा दशरथ मांझी के संघर्ष और पुरुषार्थ की कहानी सुनाकर उससे प्रेरणा लेने का आव्हान किया।
शिविर संचालन में तनु आर्या, सुनिल चारण, सचिन कुमावत, सरदार निहालसिंह सहायक शिक्षक के रूप में सहयोग कर रहे हैं। आज अल्पाहार के लाभार्थी राकेश बोहरा द्वारा बच्चों एवं उनके अभिभावकों को स्पेशल झालमूडी बनवाकर खिलाई गई।











