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गोल्डन नेस्ट अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई स्वागतयोग्य, लेकिन जवाबदेही भी तय हो

Jethmal Rathod

मीरा-भायंदर। भाईंदर पूर्व के गोल्डन नेस्ट क्षेत्र में मनपा आरक्षित भूखंड क्रमांक 122 पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमणों के खिलाफ मीरा-भायंदर महानगरपालिका द्वारा की गई कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अभियान के तहत अवैध झोपड़ों, गोदामों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ नूरी मस्जिद और शिव मंदिर जैसे धार्मिक ढांचों को भी हटाया गया, जिससे प्रशासन ने कानून के समान अनुपालन का संकेत दिया है।

संवेदनशीलता को देखते हुए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच की गई यह कार्रवाई करोड़ों रुपये मूल्य की सार्वजनिक एवं आरक्षित भूमि को मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। मनपा के उपायुक्त स्वप्निल सावंत द्वारा सरकारी और मनपा भूमि पर बने सभी अवैध अतिक्रमण हटाने की घोषणा भी शहर नियोजन और सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है।

हालांकि इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। जिस भूमि पर दो से ढाई दशक तक अवैध निर्माण होते रहे, वहां प्रशासन और संबंधित विभाग इतने वर्षों तक मौन क्यों रहे? यदि यह भूमि आरक्षित थी तो अतिक्रमण को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? आखिर किन अधिकारियों की निगरानी में झोपड़ियां, गोदाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और धार्मिक ढांचे खड़े होते रहे?

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सिर्फ बुलडोजर चलाना पर्याप्त नहीं है। उन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिनकी लापरवाही या संभावित मिलीभगत के कारण सार्वजनिक भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पनपता रहा। यदि जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो ऐसी घटनाएं भविष्य में फिर दोहराई जा सकती हैं।

दो धार्मिक स्थलों पर हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि कानून की नजर में सभी अवैध निर्माण समान हैं। लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शहर की अन्य आरक्षित और सरकारी जमीनों पर भी इसी प्रकार निष्पक्ष एवं समान कार्रवाई हो। अन्यथा चयनात्मक कार्रवाई के आरोप लगना स्वाभाविक होगा।

वास्तविक सफलता केवल अतिक्रमण हटाने में नहीं, बल्कि भविष्य में नए अतिक्रमण रोकने, सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पुराने मामलों में जवाबदेही तय करने में निहित है। जनता यह जानना चाहती है कि वर्षों तक सरकारी भूमि पर कब्जे कैसे होते रहे और उन्हें संरक्षण किसका प्राप्त था।

जनहित में आवश्यक है कि कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। तभी सार्वजनिक और आरक्षित भूमि वास्तव में जनता के हित में सुरक्षित रह सकेगी।

न्यूज़ डेस्क

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