“जीवन में सच्ची दृष्टि सदगुरु से ही प्राप्त होती है”

Vikram B Rathod
मुण्डारा
श्री शांतिनाथ श्वेतांबर मूर्तिपूजन जैन संघ -मुण्डारा की धन्यधरा पर मरुधर रत्न जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. के संयम सुवर्ण वर्ष की हार्दिक अनुमोदनार्थ एवं तीन जैन मंदिरों की ध्वजारोहण प्रसंग निमित्त त्रिदिवसीय रत्नत्रयी भक्ति महोत्सव का आज से मंगल शुभारंभ हुआ।
प्रातः 8:00 बजे श्री आदिनाथ जैन मंदिर बस स्टेण्ड- से भव्य सामैया प्रारंभ हुआ।म्यूजिकल बैंड की रमझट के साथ मुण्डारा के राजमार्ग से प्रसार होते हुए मार्ग में मातुश्री नेकीबाई अमरचंद जी मेहता एवं मातुश्री दरियाबाई मिश्रीमल जी मन्डलेशा आदि गृहागणों में जैनाचार्य के पगले हुए ।
आराधना भवन में धर्मसभा का आयोजन हुआ। प्रवचन देते हुए जैनाचार्य श्री ने कहा कि –
दुनिया के लोग चर्मचक्षु से न देख सके ऐसे व्यक्ति को अंध कहते हैं। परंतु जो चर्म चक्षु से देखने में समर्थ होने पर भी परधन को पत्थर तुल्य, परस्त्री को माता तुल्य और सभी जीवों को आत्मतुल्य नहीं देखता ,वह वास्तव में अंध है.
जीवन में यह सच्ची दृष्टि सद्गुरु के माध्यम से ही प्राप्त होती है ।मेरे जीवन में सद्गुरु पन्यास प्रवर श्री भद्रंकर विजय जी के श्रीमुख से आधी दीक्षा स्वरूप ब्रह्मचर्य व्रत की प्राप्ति इसी मुण्डारा नगर में आज से 52 वर्ष पूर्व 18 जून 1975 के शुभ दिन हुई थी।


दुनिया के लोग सत्ता, संपत्ति और शक्ति पाने के लिए प्रार्थना करते हैं। M.L.A , M.P. बनना चाहता हैं और M.P. – P.M. बनना चाहता है परंतु मानव जन्म की सफलता व्रत-नियम और संयम की साधना में है ।अपने जीवन में भी संयम प्राप्ति का लक्ष्य होना चाहिए।
दोपहर 4:00 बजे समूह सामायिक का आयोजन हुआ।
दिनांक 23 जून को प्रातः 8:30 संयम संवेदना एवं जैनाचार्य श्री और रत्नसेन सूरीश्वरजी द्वारा आलिखित 275 वीं पुस्तक – “आओ ! भाव समायिक करें ! ” का भव्य विमोचन होगा
दोपहर 3:00 बजे शक्रत्सव महाभिषेक एवं शाम 7:30 बजे मंदिर जी में प्रभु भक्ति होगी ।
दि. 24 जून को प्रातः 7:30 बजे तीन मंदिरों में ध्वजारोहण होगा।











