आचार्य गुरूभगवंत रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. का भव्यातिभव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश पींडवाड़ा में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

Vikram B Rathod
पींडवाड़ा। लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पींडवाड़ा की पावन धरा पर आचार्य गुरूभगवंत रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब का भव्यातिभव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। नगर में इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।
चातुर्मास मंगल प्रवेश के अवसर पर नगर पालिका परिसर से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा मंगल कलश चौराहा, पेला वास सेरी, देवड़ा वास, वेलाजी वास एवं नई सेरी से होते हुए गुरु मंदिर पहुंची, जहां दर्शन के पश्चात आराधना भवन में आचार्यश्री का भव्य मंगल प्रवेश कराया गया। इसके उपरांत विशाल धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसकी शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
विश्वविख्यात जैन संगीतकार एवं बाली रत्न अनिल गेमावत ने अपनी मधुर वाणी में गुरु भगवंत के भक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन निलेश मेहता ने किया।
शोभायात्रा में घोड़े पर जैन शासन की पताका लहराती हुई आगे बढ़ रही थी। मधुर शहनाई की स्वर लहरियों के बीच गुरु भगवंत की प्रतिमा को सुसज्जित रथ में विराजमान किया गया। वहीं विंटेज कार में आचार्यश्री का भव्य चित्र आकर्षण का केंद्र रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक चूंदड़ी की साड़ी धारण कर सिर पर मंगल कलश रखे और गुरु भगवंत की प्रदक्षिणा की। आचार्यश्री ने वासक्षेप कर मंगल कलशधारी महिलाओं को वधामनी प्रदान की। पुरुष श्रद्धालु साफा एवं खेस धारण कर शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

पींडवाड़ा जैन संघ के युवा सचिव मनीषभाई ने बताया कि यह चातुर्मास ऐतिहासिक रहेगा और वर्षों तक इसकी स्मृतियां श्रद्धालुओं के मन में जीवित रहेंगी।
इस अवसर पर आचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब द्वारा रचित 276वीं हिन्दी पुस्तक “चिंतन की चांदनी” का भी भव्य विमोचन किया गया। साथ ही वर्ष 2027 एवं 2028 के चातुर्मास हेतु रानी जैन संघ एवं कांकरोली (मेवाड़) जैन संघ द्वारा विनती प्रस्तुत की गई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि चातुर्मास संयम, त्याग, तपस्या और आत्मकल्याण का अनुपम अवसर है। उन्होंने पींडवाड़ा के रत्न पूज्य प्रेमसूरीश्वरजी महाराज के प्रेरणादायी जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण कर फल, सूखे मेवे, काजू, बादाम, मिठाई एवं नमकीन सहित अनेक पदार्थों का आजीवन त्याग कर दिया था।
चातुर्मास मंगल प्रवेश में बाली से दो बसें, फालना से एक बस, रानी से एक बस, कांकरोली से बसों के साथ हजारों निजी वाहनों द्वारा श्रद्धालु पहुंचे। इसके अलावा बारगांव से भी हजारों भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। श्रद्धालुओं के लिए सुबह नवकारसी तथा दोपहर के भोजन की व्यवस्था मेहता की वाड़ी में की गई।
गुरु पूजन के लाभार्थी मधुबेन, कुंदनमलजी एवं चंदनमलजी जोगातर (पींडवाड़ा) रहे। वहीं कांबली ओढ़ाने के लाभार्थी बदामीबाई चमपालालजी राठौड़ (बाली-ईरोड़) एवं राकेश राठौड़ रहे।
चातुर्मास मंगल प्रवेश का यह ऐतिहासिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन और धार्मिक उल्लास का अद्भुत संगम बनकर लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।











