सावरकर पर सवाल पूछना अपराध नहीं, शिक्षक का निलंबन तत्काल वापस हो: कैलाश चंद्र सुथार

कुमार प्रवीण सेन
एबीआरएसएम ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, शिक्षकों ने किया धरना-प्रदर्शन
भीलवाड़ा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) के आह्वान पर भीलवाड़ा जिला इकाई के बैनर तले सोमवार को शिक्षकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदेश संगठन मंत्री कैलाश चंद्र सुथार, प्रदेश सेवानिवृत्त प्रकोष्ठ की सुशीला जाट एवं जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र बड़वा के नेतृत्व में शिक्षकों ने माननीय प्रधानमंत्री, केरल के राज्यपाल एवं केरल के मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से केरल के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी सोशल साइंस फ्रीडम क्विज में स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के मामले में शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
जिला मंत्री ईश्वर सिंह चौधरी ने बताया कि धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश संगठन मंत्री कैलाश चंद्र सुथार ने कहा कि वीर विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व रहे हैं। उनका क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिया गया कठोर दंड तथा अंडमान की सेल्युलर जेल में उनका कारावास इतिहास का स्वाभाविक हिस्सा है।
सुथार ने कहा कि सावरकर पर प्रश्न पूछना न तो अपराध है, न अनुशासनहीनता और न ही किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार। किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के विचारों से सहमत या असहमत होना अलग विषय है, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को इतिहास से बाहर नहीं किया जा सकता।
निष्पक्ष जांच की मांग
जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र बड़वा ने कहा कि यदि संबंधित प्रश्नावली उप जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से अनुमोदन के बाद विद्यालयों में प्रसारित की गई थी, तो कथित त्रुटि के लिए केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने प्रश्न तैयार करने, उसके स्रोत, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई से शिक्षक समुदाय में भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण बन सकता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर शिक्षक गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
प्रदेश सेवानिवृत्त प्रकोष्ठ की सुशीला जाट ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं है। देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सभी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं का अध्ययन निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रूप से किया जाना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन में कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश भट्ट, राम प्रसाद माणम्या, राजेंद्र शर्मा, विनोद झंवर, बसंत पोरवाल, अजीत सिंह, बनवारी लाल काबरा, नीता रावत, शारदा विश्नोई, विनोद कुमार चौहान, महेश मंडोवरा, पुष्कर तेली, जयवर्धन हवा, संतोष बिश्नोई, सत्यनारायण मंत्री, ओम प्रकाश सुथार, राजेंद्र काबरा, प्रेम व्यास, अनिल आसोपा, राधेश्याम मीणा, किशन लाल माली सहित जिला एवं खंड कार्यकारिणी के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक एवं सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मुख्य मांग: शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन को तत्काल वापस लेकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए।











