युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी एवं साध्वीवृंद के चातुर्मास मंगल प्रवेश पर उमड़ा श्रद्धा, भक्ति और आस्था का विराट जनसैलाब

Jethmal Rathod
वस्त्रनगरी भीलवाड़ा बनी धर्मनगरी, हजारों श्रद्धालुओं की साक्षी में शांतिभवन में हुआ चातुर्मास मंगल प्रवेश
मंगल प्रवेश का उत्साह चार माह की साधना में बदले : युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी
भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला, जब श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा., हितमित भाषी हितेन्द्र ऋषिजी , तपस्वी धवल ऋषिजी, महक ऋषिजी,यशोदिप्ती मधुकंवर जी,उपप्रवर्तिनी दिव्यज्योतिजी,मधुर व्याख्यानी सुचेताजी,एवं साध्वी पियूष दर्शनाजी सहित साधु-साध्वीवृंद का चातुर्मास मंगल प्रवेश भव्य शोभायात्रा के साथ शांतिभवन, भोपालगंज पहुँचा। शांतिभवन श्रीसंघ के संरक्षक नवरतन बंब,अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद चीपड़, चातुर्मास संयोजक कंवरलाल सूरिया, मदनलाल चौरड़िया,मंत्री नवरतनमल भलावत, सुशील चपलोत, नरेन्द्र भंडारी, मीठ्ठालाल सिंघवी, आनन्द चपलोत, महावीर नवयुवक मंडल सेवा संस्थान के संरक्षक बाबूलाल सूरिया, अध्यक्ष मनीष कोठारी, हुक्मीचंद खटोड़, शोभायात्रा संयोजक अनुराग नाहर, जयप्रकाश आंचलिया, जितेन्द्र काठेड़, नवीन नाहर तथा शांति जैन महिला मंडल की अध्यक्षा सिम्मी पोखरना, चंदा कोठारी, प्रमिला कोटिचा एवं मंजू खटवड़ सहित समाज के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने युवाचार्यश्री एवं साधु-साध्वीवृंद की अगवानी करते हुए अभिनन्दन किया गया।
इस अवसर पर मेवाड़ गौरव रविन्द्र मुनिजी म.सा., सेवाभावी महासती ज्ञानकंवरजी म.सा. एवं सांसद दामोदर अग्रवाल की उपस्थिति रही। शांतिभवन के मंत्री नवरतनमल भलावत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातः वर्धमान कॉलोनी स्थित अम्बेश स्वाध्याय भवन से प्रारंभ हुई मंगल प्रवेश यात्रा माणिक्य नगर, महाराणा टॉकीज, नेहरू रोड, नेताजी सुभाष मार्केट एवं गोल प्याऊ चौराहा होते हुए आगे बढ़ी। इसमें भीलवाड़ा सहित देशभर से पहुँचे हजारों श्रावक-श्राविकाएँ अनुशासित भाव से सम्मिलित हुए। धर्मध्वजाओं, मंगलकलशों, नवकार मंत्र की मंगलध्वनि और जयघोषों से नगर का वातावरण धर्ममय हो उठा। चातुर्मास मंगल प्रवेश के अवसर पर युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने समाज की श्रद्धा, समर्पण और उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी आध्यात्मिक यात्रा का वास्तविक मूल्य उसके भव्य आरंभ में नहीं, बल्कि उसके निरंतर पुरुषार्थ में निहित होता है।

समाज ने जिस श्रद्धा, उमंग और भावनाओं के साथ चातुर्मास मंगल प्रवेश को सम्पन्न किया है, वही भावना आगामी चार माह तक साधना, आराधना, स्वाध्याय और आत्मानुशासन के रूप में निरंतर बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महान संकल्प की सफलता केवल उसके प्रारंभ से नहीं, बल्कि उसे निरंतर आगे बढ़ाने वाले पुरुषार्थ से निर्धारित होती है। धर्म धैर्य, संयम और निरंतर साधना का मार्ग है। सत्य, आत्मचिंतन और सदाचार की दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा से हमारा आत्मीय जुड़ाव रहा है। इसी अपनत्व और विश्वास के कारण इस चातुर्मास के लिए भीलवाड़ा को प्रदान किया गया। अब समाज का दायित्व है कि मंगल प्रवेश के अवसर पर दिखाई दिया उत्साह केवल समारोह तक सीमित न रहे, बल्कि आगामी चार माह तक प्रत्येक परिवार और प्रत्येक हृदय में साधना की चेतना के रूप में जीवंत बना रहे।
उन्होंने कहा कि हम यहां केवल चातुर्मास करने नहीं आए हैं, बल्कि समाज को साधना, आराधना, स्वाध्याय और आध्यात्मिक जागरण की दिशा में आगे बढ़ाने आए हैं। यदि इन चार महीनों में प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में संयम, आत्मचिंतन और धर्ममय आचरण को स्थान देता है, तो यही चातुर्मास मंगल प्रवेश की वास्तविक सार्थकता होगी। इस दौरान श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं अखिल भारतीय जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं नई दिल्ली स्थित अरिहंत नगर से आए प्रतिनिधिमंडल ने युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. से आगामी वर्ष 2027 के चातुर्मास के लिए विनती प्रस्तुत की











