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शाहपुरा में नगर पालिका चुनाव का सियासी रण अब पूरी तरह सज चुका है।

मूलचन्द पेसवानी

  • शाहपुरा में सियासी शतरंज बिछी, 23,438 वोटर करेंगे 110 प्रत्याशियों का फैसला
  • 35 वार्डों में सियासी संग्राम, कहीं भाई-भाई आमने-सामने, कहीं ससुर-पुत्रवधू की टक्कर
  • निर्दलीय और ‘जिला बचाओ’ मोर्चा बिगाड़ सकता है कांग्रेस-भाजपा का गणित

नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 35 वार्डों में 110 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। अब शाहपुरा के 23,438 मतदाता 35 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर इन प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत का फैसला करेंगे।

इस बार का चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा, बल्कि यह स्थानीय राजनीति में किसका जनाधार मजबूत है, किसकी जमीन खिसक रही है और कौन नया चेहरा पुराने समीकरणों को पलट सकता है, इसका भी बड़ा इम्तिहान बन गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबले के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने कई वार्डों में चुनावी तस्वीर उलझा दी है। वहीं शाहपुरा जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबले में तीसरा राजनीतिक कोण भी उभर आया है।

कहीं पुराने दिग्गज फिर मैदान में हैं, तो कहीं पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी मतदाताओं से बदलाव का मौका मांग रहे हैं। खास बात यह है कि कुछ वार्डों में राजनीति ने पारिवारिक रंग भी ले लिया है। कहीं भाई-भाई आमने-सामने हैं तो कहीं ससुर-पुत्रवधू चुनावी मैदान में हैं।

23,438 मतदाता तय करेंगे 110 प्रत्याशियों का भविष्य-

रिटर्निंग अधिकारी एवं उपखंड अधिकारी बनवारी लाल सिनसिनवार ने बताया कि 3 सितंबर 2026 को अपराह्न 3 बजे नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद नगर पालिका के 35 वार्डों में कुल 110 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। शाहपुरा में 35 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां कुल 23,438 मतदाता मतदान कर नगर पालिका के अगले बोर्ड की तस्वीर तय करेंगे।.

इन मतदाताओं का फैसला केवल 35 पार्षदों का चयन नहीं करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि नगर पालिका में आने वाले समय में किस राजनीतिक दल की पकड़ मजबूत होगी और बोर्ड की राजनीति की दिशा कौन तय करेगा।

वार्ड 14 और 26 में पांच-पांच प्रत्याशी, वोटों का बंटवारा बनेगा बड़ा फैक्टर-

सभी 35 वार्डों में मुकाबला एक जैसा नहीं है। वार्ड नंबर 14 और वार्ड नंबर 26 में सबसे अधिक पांच-पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

इन वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय होने के कारण वोटों का विभाजन जीत-हार का सबसे बड़ा फैक्टर बन सकता है। एक प्रत्याशी के पक्ष में वोटों का मामूली झुकाव भी परिणाम का रुख बदल सकता है। ऐसे में इन दोनों वार्डों में राजनीतिक दलों की रणनीति के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका पर भी खास नजर रहेगी।

कांग्रेस के अनुभवी चेहरे फिर मैदान में-

कांग्रेस ने इस चुनाव में कई पुराने और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस नगर अध्यक्ष एवं पार्षद प्रत्याशी रमेश सेन के अनुसार पार्टी के कई प्रत्याशी पूर्व में नगर पालिका की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वार्ड नंबर 6 से नमन ओझा और वार्ड नंबर 23 से मधु पोडिक पूर्व में नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद संभाल चुके हैं। ऐसे में इन दोनों प्रत्याशियों के सामने अपने पुराने राजनीतिक प्रभाव को फिर मतों में बदलने की चुनौती है। वार्ड नंबर 15 से रमेश सेन का चुनावी अनुभव भी लंबा है।

वे चार बार लगातार पार्षद, एक बार मनोनीत पार्षद और एक बार प्रतिपक्ष नेता रह चुके हैं। इस बार वे फिर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में उनके लिए यह चुनाव व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल भी माना जा रहा है।

कांग्रेस के कई अन्य अनुभवी चेहरे भी मैदान में हैं। मधु शर्मा, इशाक मोहम्मद, नाथूलाल कोली, ओमप्रकाश सेन, रुखसाना बानो और रचना मिश्रा दूसरी बार पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें रचना मिश्रा प्रतिपक्ष नेता की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। यानी कांग्रेस के सामने कई वार्डों में अनुभव बनाम नए चेहरे की जंग है।

अब मतदाता पुराने अनुभव पर भरोसा जताते हैं या नई पीढ़ी को मौका देते हैं, इसका फैसला चुनाव परिणाम करेगा।

भाजपा के पुराने खिलाड़ी भी मैदान में, प्रतिष्ठा की परीक्षा-

भाजपा के वरिष्ठ पार्षद स्वराज सिंह शेखावत के अनुसार भाजपा की ओर से भी कई अनुभवी चेहरे चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा जिला मंत्री राजेंद्र बोहरा व नगर भाजपा अध्यक्ष पंकज सुगंधी प्रमुख है। स्वराज सिंह शेखावत तीन बार पार्षद रह चुके हैं और चौथी बार चुनाव मैदान में हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद इस बार उनके सामने फिर से मतदाताओं का भरोसा हासिल करने की चुनौती है। ज्ञानचंद धाकड़ का चुनावी सफर भी खासा दिलचस्प है।

वे दो बार निर्दलीय और एक बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं तथा अब चौथी बार चुनाव मैदान में हैं। वे नगर पालिका में एक बार उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में उनका मुकाबला केवल पार्टी के टिकट का नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जनाधार का भी इम्तिहान माना जा रहा है। इसके अलावा राजेश सोलंकी, रमेश मारू और गोपाल घूसर एक बार निर्दलीय तथा एक बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और अब तीसरी बार मैदान में हैं। मोहन गुर्जर तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि योगेश पारीक, पूजा कोली, ललिता कहार और ईश्वर भील दूसरी बार पार्षद पद के लिए मैदान में उतरे हैं। इससे साफ है कि भाजपा भी कई वार्डों में पुराने चेहरों के सहारे अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है।

शाहपुरा में चुनावी मैदान ने लिया पारिवारिक रंग-

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीरों में पारिवारिक मुकाबले भी शामिल हैं। कांग्रेस के चुनावी मैदान में दो जोड़े और दो भाई होने की बात सामने आई है। वहीं एक जोड़ा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में है। कांग्रेस प्रत्याशी लादू लाल खटीक और उनकी पुत्रवधू ममता चावला भी अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं।

एक ही परिवार के दो सदस्यों के चुनाव मैदान में होने से राजनीतिक गलियारों में परिवार के प्रभाव और जनाधार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं वार्ड नंबर 34 से निर्दलीय हमीद खां और वार्ड नंबर 1 से उनकी पत्नी सलमा बानो भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। यानी शाहपुरा में इस बार मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं है। कई वार्डों में व्यक्तिगत संबंध, परिवार, पुराने संपर्क और व्यक्तिगत जनाधार भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन गए हैं।

निर्दलीय प्रत्याशी, किसका वोट काटेंगे, किसकी राह रोकेंगे?

निकाय चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी अक्सर हार-जीत के अंतर से ज्यादा बड़ा प्रभाव डालते हैं। वे स्वयं जीतें या नहीं, लेकिन यदि किसी प्रमुख प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगा दें तो पूरा चुनावी गणित बदल सकता है। शाहपुरा में भी कई वार्डों में निर्दलीयों की मौजूदगी कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। सवाल यह है कि निर्दलीय प्रत्याशी किसके पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाएंगे? यदि वोटों का विभाजन हुआ तो इसका सीधा फायदा उस प्रत्याशी को मिल सकता है, जो कम वोटों के बावजूद बढ़त बनाने में सफल हो जाए।

‘जिला बचाओ’ मोर्चा ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल-

शाहपुरा नगर पालिका चुनाव में शाहपुरा जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा की चुनावी मौजूदगी ने मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले की उम्मीद कर रहे राजनीतिक विश्लेषकों के सामने अब तीसरा कोण भी है।

मोर्चे के प्रत्याशी अपने मुद्दों और स्थानीय जनभावनाओं के आधार पर मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि मोर्चा किस दल के वोटों में सेंध लगाता है?
क्या उसका असर भाजपा के वोट बैंक पर पड़ेगा?
क्या कांग्रेस को नुकसान होगा?
या फिर मोर्चा दोनों दलों से नाराज मतदाताओं को अपने पक्ष में खींचकर एक अलग राजनीतिक ताकत के रूप में उभरेगा? इन सवालों का जवाब चुनाव परिणाम ही देगा। लेकिन इतना तय है कि मोर्चे की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों की रणनीति को प्रभावित किया है।

पुराने दिग्गज बनाम नए चेहरे, किसका पलड़ा भारी?
शाहपुरा के चुनाव में एक तरफ वर्षों से नगर पालिका की राजनीति में सक्रिय अनुभवी चेहरे हैं, तो दूसरी ओर पहली बार चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी हैं। अनुभवी प्रत्याशी अपने कार्यकाल, व्यक्तिगत संपर्क और पुराने जनाधार के भरोसे मैदान में हैं, जबकि नए चेहरे परिवर्तन, नई सोच और नए नेतृत्व का दावा कर रहे हैं। यही मुकाबला इस चुनाव को खास बना रहा है।
23,438 मतदाताओं के हाथ में बोर्ड की चाबी-
शाहपुरा के 35 वार्डों में होने वाले चुनाव में 23,438 मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। 35 मतदान केंद्रों पर होने वाला मतदान तय करेगा कि अगले नगर पालिका बोर्ड में किस दल के कितने पार्षद पहुंचते हैं। बहुमत का गणित बनने के बाद अध्यक्ष पद को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज होना तय है। ऐसे में प्रत्येक वार्ड का परिणाम पूरे बोर्ड की तस्वीर बदल सकता है।

अब हर वार्ड में एक ही चर्चा, कौन जीतेगा?
किसी के पास पार्टी का झंडा है तो किसी के पास व्यक्तिगत जनाधार। कोई वर्षों से राजनीति कर रहा है तो कोई पहली बार मतदाताओं के दरवाजे पर पहुंचा है। कोई बागी तेवरों के साथ निर्दलीय मैदान में है तो कोई जिला बचाओ के मुद्दे को लेकर जनता के बीच है। 110 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला भले ही 35 वार्डों में बंटा हो, लेकिन हर प्रत्याशी की नजर जीत पर है। अब देखना यह है कि 23,438 मतदाताओं की पसंद क्या कहती है।

अनुभव, संगठन, नया चेहरा, व्यक्तिगत पकड़ या स्थानीय मुद्दे?
शाहपुरा का चुनाव परिणाम केवल पार्षदों की सूची नहीं देगा, बल्कि यह भी बताएगा कि शाहपुरा की स्थानीय राजनीति में किसका जनाधार मजबूत है और किसके सियासी किले में सेंध लग चुकी है। फैसला जनता की अदालत में होगा और 23,438 मतदाताओं का फैसला शाहपुरा की अगली सियासी तस्वीर लिखेगा।


 

Khushal Luniya

Meet Khushal Luniya – A Young Tech Enthusiast, AI Operations Expert, Graphic Designer, and Desk Editor at Luniya Times News. Known for his Brilliance and Creativity, Khushal Luniya has already mastered HTML and CSS. His deep passion for Coding, Artificial Intelligence, and Design is driving him to create impactful Digital Experiences. With a unique blend of technical skill and artistic vision, Khushal Luniya is truly a rising star in the Tech and Media World.

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