मोबाइल युग में वैदिक कालीन गुरुकुल की वापसी: 5:30 बजे से शुरू होता है शिविर 2:30 घंटे अनवरत मौन प्रशिक्षण

Ghevarchand Arya
आर्य वीर दल पाली में वेदमंत्र-ध्यान-योग से हो रहा चरित्र निर्माण, प्रशिक्षण समय में गपशप पर पूर्ण रोक
पाली 13 जून शहर के युवा जब देर रात तक मोबाइल में व्यस्त रहकर सुबह देर से उठते हैं, उस समय आर्य वीर दल के वीर-वीरांगनाएं ब्रह्ममुहूर्त में 5:30 बजे व्यायाम शाला में एकत्र हो जाते हैं। शिविर का आरंभ वेदमंत्रों के साथ ओ३म् ध्वजगान एवं सलामी से होता है। इसके बाद ढाई घंटे तक बिना किसी व्यवधान के अनवरत शारीरिक एवं बौद्धिक प्रशिक्षण का क्रम चलता है।
शिविर समय में अनुशासन का स्तर ऐसा है कि प्रशिक्षण अवधि में आपस में बातचीत करना और मोबाइल फोन का उपयोग करना सख्त वर्जित है। “एकाग्रता के लिए मौन अनिवार्य है” इसलिए प्रतिदिन की दिनचर्या में शरीर के लिए विभिन्न तरह के योगासन तथा व्यायाम और बौद्धिक ज्ञान के लिए 15 मिनट के लिए ध्यान- संध्या- यज्ञ का अभ्यास कराया जाता है जिससे मन एकाग्र, और बुद्धि का विकास होता है।

शिविर के दुसरे दिन आज शिक्षक जीवनलाल आर्य वीर द्वारा सर्वाग सुन्दर व्यायाम के तहत भुजबल शक्ति विकास, वक्ष विकास, स्कन्ध शक्ति विकास, अलग-अलग दण्ड बैठक के अभ्यास तथा आत्मरक्षा के तहत नियुद्धम् प्रथम श्रेणी का अभ्यास करवाया गया। जिसमें त्रिदेश मुष्ठी प्रहार, अर्द्ध मुष्ठी प्रहार, संयुक्त मुष्ढी प्रहार, तथा लाठी संचालन के तहत प्रहार (मार हाथ), बचाव (रोक हाथ), रणमार बाई और से पीछे आगे मारना आदि के गुर सिखाए गये।
बौद्धिक सत्र में आर्य समाज संरक्षक शिवराम आर्य ने आदर्श दिनचर्या के बारे में उद्बोधन देते हुए बताया कि दिनचर्या से मन में सकारात्मक भावो की वृद्धि होती जिससे मन में प्रसन्नता आती है और कार्य में सफलता मिलती है। दुसरे दिन 150 बच्चों से बढ़कर 170 बच्चों ने इस कठोर दिनचर्या को अपनाया है। महिला आर्य समाज की निर्मला मेवाड़ा ने बताया कि बालिकाएं भी पूरे उत्साह से भाग ले रही हैं।











