???? ‘मौत का गड्ढा’ बनी जवाईबांध रोड: खुले सीवरेज ढक्कनों ने खड़ी की जानलेवा साजिश

???? ठेकेदार की बेशर्मी की हद—न बैरिकेड, न चेतावनी; हर रात हादसे का काउंटडाउन शुरू
रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर
सुमेरपुर में जंगल राज लोगों के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं –
सुमेरपुर। शहर की जवाईबांध रोड पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब आमजन के लिए राहत नहीं, बल्कि सीधी मौत का खतरा बन गया है। ठेकेदार की घोर लापरवाही के चलते सड़क पर जगह-जगह सीवरेज के ढक्कन खुले छोड़ दिए गए हैं, जिनके आसपास न तो कोई सुरक्षा घेरा है और न ही किसी प्रकार की चेतावनी। यह स्थिति किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रात के अंधेरे में यह सड़क पूरी तरह “मौत का ट्रैप” बन जाती है। न रेडियम रिफ्लेक्टर, न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेड—ऐसे में वाहन चालक और राहगीर अनजाने में इन गहरे गड्ढों की चपेट में आ सकते हैं। एक छोटी सी चूक सीधे जान पर भारी पड़ सकती है।
???? सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां
निर्माण कार्य के दौरान बेसिक सुरक्षा नियमों का पालन करना ठेकेदार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां तो नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सीवरेज के खुले ढक्कन बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छोड़ देना सीधा-सीधा आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।
???? प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या आमजन की जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है कि इस तरह की लापरवाही को नजरअंदाज किया जा रहा है?
???? हर गुजरता वाहन खतरे में
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन में तो किसी तरह स्थिति संभल जाती है, लेकिन रात में यहां से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सड़क सबसे ज्यादा जोखिम भरी बन चुकी है, जहां जरा सी चूक सीधे गंभीर हादसे में बदल सकती है।
???? हादसे से पहले जागे प्रशासन
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन खुले सीवरेज ढक्कनों को ढंका नहीं गया और उचित सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करना सिर्फ खानापूर्ति रह जाएगा।
???? जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई
ग्रामीणों और शहरवासियों ने मांग की है कि लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और सड़क पर तुरंत बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड व रिफ्लेक्टर लगाए जाएं।
जवाईबांध रोड की यह स्थिति साफ संकेत दे रही है कि अगर अब भी जिम्मेदार नहीं चेते, तो यह लापरवाही किसी की जिंदगी छीन सकती है।













