
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की चुनौती और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम के बावजूद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार है। वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा में दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 48 लाख के पार पहुंच गई है। यात्रा के दौरान बदरीनाथ धाम श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है, जबकि केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष यात्रा पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति में है और नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है।
19 अप्रैल 2026 को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। 21 अगस्त तक यात्रा के 125 दिनों में कुल 48,04,897 श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके थे। यह संख्या वर्ष 2025 की इसी अवधि में पहुंचे 42,82,263 यात्रियों की तुलना में 5,22,634 अधिक है। इस बढ़ोतरी से साफ है कि मानसून के दौरान मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है।
धामवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बदरीनाथ धाम में अब तक सबसे अधिक 16,54,263 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके बाद केदारनाथ धाम में 14,65,370, गंगोत्री धाम में 7,47,671 और यमुनोत्री धाम में 6,68,163 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इसके अलावा हेमकुंड साहिब में भी 2,69,430 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। इन आंकड़ों में बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा का सबसे बड़ा योगदान दिखाई दे रहा है।
यमुनोत्री धाम ने इस वर्ष खास उपलब्धि हासिल की है। पहली बार यहां श्रद्धालुओं की संख्या 6.68 लाख से अधिक पहुंची है। वर्ष 2025 में पूरे यात्रा काल में 6,44,637 श्रद्धालु यमुनोत्री पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा उस स्तर को पार कर चुका है। इससे यमुनोत्री धाम में बढ़ती तीर्थयात्री संख्या और यात्रा के प्रति लोगों की रुचि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मानसून के दौरान चारधाम यात्रा को लेकर सबसे बड़ी चुनौती मौसम और पहाड़ी मार्गों की स्थिति है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक मौसम खराब होने जैसी परिस्थितियां यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जा रही है। मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा को नियंत्रित करने और मार्गों की स्थिति के अनुसार निर्णय लेने पर भी जोर दिया जा रहा है।
चारधाम यात्रा मार्गों से जुड़े रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रखा गया है। मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताया है।
यात्रा की बढ़ती संख्या के बीच पंजीकरण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा पोर्टल के अनुसार यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। श्रद्धालु ऑनलाइन पोर्टल और Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। आधिकारिक पोर्टल पर यात्रा की योजना, धाम और यात्रा तिथि सहित आवश्यक जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था उपलब्ध है।
22 अगस्त तक चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए 61.71 लाख से अधिक तीर्थयात्री पंजीकरण करा चुके थे। इनमें केदारनाथ के लिए करीब 20 लाख, बदरीनाथ के लिए 18.43 लाख, गंगोत्री के लिए 10.62 लाख, यमुनोत्री के लिए 10.11 लाख और हेमकुंड साहिब के लिए 2.55 लाख पंजीकरण शामिल हैं। बड़ी संख्या में पंजीकरण यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी यात्रा में श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रह सकती है।
उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री राज्य के प्रमुख चारधाम तीर्थस्थल हैं। ये सभी धाम हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। बदरीनाथ लगभग 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि केदारनाथ की यात्रा में गौरीकुंड के बाद करीब 16 किलोमीटर का पैदल मार्ग शामिल है। ऐसे में ऊंचाई, मौसम और लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए तैयारी करना जरूरी है।
आधिकारिक यात्रा पोर्टल पर श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले पंजीकरण प्रमाणपत्र तैयार रखने, वैध पहचान पत्र साथ रखने और आवश्यक दवाइयां रखने की सलाह दी गई है। ठंडे मौसम को देखते हुए जैकेट, शॉल और दस्ताने जैसे गर्म कपड़े साथ रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से यात्रियों से मौसम और मार्ग की स्थिति की जानकारी लेते हुए यात्रा करने तथा आपात परिस्थितियों में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के साथ राज्य में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और अन्य पर्यटन सेवाओं को भी यात्रियों की संख्या से लाभ मिलता है। हालांकि भारी भीड़ और मानसून के दौरान यात्रा संचालन के बीच प्रशासन के सामने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सुविधाओं और मार्गों को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी बनी रहती है।
सितंबर में चारधाम यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत होने की संभावना के बीच 48 लाख से अधिक दर्शनार्थियों का आंकड़ा इस यात्रा सीजन की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहा और यात्रा मार्ग सामान्य बने रहे तो इस वर्ष चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बना सकती है। फिलहाल मौसम की चुनौती के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था लगातार आगे बढ़ रही है और उत्तराखंड के धामों में जयकारों की गूंज बनी हुई है।











