प्रेक्षा संग मनीष का आदर्श वैदिक विवाह, आर्य समाज के सान्निध्य में वर-वधु को मिला समाज का आशीर्वाद

घेवरचंद आर्य पाली
पाली आज के समय में विवाह समारोहों में अनेक कुरितियां प्रचलित हो गई हैं। डीजे की कर्णभेदी आवाज, फूहड़ नृत्य, धन और दहेज का अनाप-शनाप प्रदर्शन… जिसका वैदिक साहित्य सहित रामायण एवं महाभारत में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। इस दिखावे की दौड़ में वैदिक विवाह संस्कार की मूल भावना कहीं खो सी गई है। एक गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार के लिए ऐसा विवाह करना दिन-ब-दिन कष्टप्रद होता जा रहा है। ऐसे माहौल में पाली निवासी वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार एवं समाजसेवी घेवरचंद आर्य ने इन सब कुरितियों को ‘अलविदा’ कहते हुए वैदिक विवाह परंपरा को महत्व दिया। उन्होंने दोनो परिवारों की रजामंदी और उपस्थिति में समाज में मिसाल कायम करते हुए अपनी सुपुत्री प्रेक्षा आर्या (27) का वैदिक विवाह कोटा निवासी मनीष राजपाल (32) के साथ आर्य समाज नया बाजार पुरानी मण्डी, पुष्कर रोड़ अजमेर में दिनांक 16 जुलाई 26.को वैदिक विधि से पण्डित श्री किशन कुमार शर्मा द्वारा सम्पन्न करवाया।
विवाह उपरांत दोनों पक्षों द्वारा वर-वधू को आशीर्वाद।
विवाह के उपरांत 9 अगस्त 26 रविवार को आर्य समाज रामपुरा, कोटा में यज्ञ कर विद्वानों और वधु पक्ष से पिता घेवरचंद आर्य, वर पक्ष से पिता दिलीप राजपाल सहित दोनों परिवारों के सदस्यो ने उपस्थित रहकर नवदम्पत्ति को आर्शीवाद दिया। यज्ञ के दौरान आचार्य विरदीचंद गोस्वामी ने आदर्श गृहस्थ जीवन, पति-पत्नी की मर्यादा और कर्तव्यों पर सारगर्भित प्रवचन दिया। उन्होंने अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधु से जीवनभर धर्म, सत्य और सेवा के पथ पर चलने का संकल्प कराया।
वधू पक्ष द्वारा वर-वधू को आशीर्वाद स्वरूप वस्त्र भेट
कार्यक्रम के पश्चात अल्पाहार का आयोजन किया गया। पिता घेवरचंद आर्य ने वर-वधु को वस्त्र भेंट कर सुखद दांपत्य जीवन की मंगलकामना की। इस अवसर पर वधु पक्ष की और से पिता घेवरचन्द आर्य, आर्य समाज कोटा के मंत्री रमेश गोस्वामी, वैदिक विद्वान पं. चन्द्र मोहन शर्मा, पं. सत्य प्रकाश शर्मा, श्रीमती संतरा शर्मा, पं बजरंगलाल शर्मा, आर्य समाज पाली के मंत्री विजयराज आर्य, आर्य वीर दल संरक्षक धनराज आर्य, और वर पक्ष की और से ओम प्रकाश राजपाल, दिलीप राजपाल, कैलाश राजपाल , विनोद राजपाल, संजय राजपाल, पूनम, हेमा, रेणू, सुनिता, उषा, मीना, भारती, सुनिता, जागृती सहित उपस्थित परिवार जनों ने नवदम्पत्ति को आर्शीवाद दिया।
आर्य समाज रामपुरा कोटा द्वारा वर-वधू को सत्यार्थ प्रकाश भेंट
इस खुशी में प्रेक्षा आर्या के पिता द्वारा उपस्थित जनों को शिल्पी ब्राह्मण, आदर्श सत्संग गुटका, अन्तिम संस्कार क्यो और कैसे, और उपदेश मंजरी की पुस्तको सहित वैदिक साहित्य का वितरण किया गया। आर्य समाज रामपुरा कोटा की और से नवदम्पत्ति को सत्यार्थ प्रकाश उपहार स्वरूप भेंट कर सुखद भविष्य की मंगलकामना दी गई।
संदेश
पाली से कोटा तक आर्य समाज के पदाधिकारियों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि आर्य समाज बेटी की भावना और इच्छा का सम्मान करते हुए अंतरजातीय विवाहों का भी खुले मन से स्वागत करता है।
दिपावली बाद होंगे आर्शीवाद समारोह
इस आदर्श वैदिक विवाह के उपलक्ष्य में वर-वधू दोनों परिवारों की सहमति से निर्णय लिया गया है कि दीपावली के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने परिवारजनों और रिश्तेदारों को बुलाकर आशीर्वाद समारोह आयोजित करेंगे। वधू पक्ष वाले कोटा में आयोजित आशीर्वाद समारोह में सम्मिलित होंगे जबकि वर पक्ष वाले पाली में आयोजित आशीर्वाद समारोह में सम्मिलित होंगे। इस प्रकार दोनों परिवारों की आत्मीय प्रगाढ़ता बढ़ेगी और रिश्तेदारी और मजबूत होगी।
आदर्श वैदिक विवाह के सम्बंध में विद्वानों की सम्मति
जांगिड़ समाज के वैदिक विद्वान पं सत्यप्रकाश शर्मा की सम्मति इस प्रकार है – नमस्ते आर्य जी आपने बिटिया प्रेक्षा संग मनीष जी के साथ वैदिक विवाह कर बड़ी ही सूझबूझ और दृष्टि से काम लिया इसके लिए आप बहुत ही धन्यवाद के पात्र है, वास्तव में आप एक बहुत ही समझदार पिता है, आपने अपनी जिम्मेदारी का पूरा पूरा पालन करते हुए एकदम सही ओर सही ओर उचित निर्णय लिया है। बेटी प्रेक्षा एक समझदार बच्ची है, अंतरजातीय विवाह करना कोई अपराध नहीं है , सिर्फ इंसान अपने , अच्छे विचारों का होना चाहिए जो बेटी ने किया। अब आप बिटिया की तरफ से निश्चिंत रहिए वह कोटा में है सुरक्षित जगह है। अब हमारी भी जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षित रहे, खुशहाल रहे। आप तो बिटिया को बता देना की जब भी कभी माता पिता की याद सताए तो पीहर समझ कर मेरे घर पर निसंकोच मिलने आ जावे।
आर्य समाज रामपुरा कोटा के मंत्री रमेशजी गोस्वामी ने अपनी सम्मति इस प्रकार व्यक्त की – अति सुन्दर आर्य जी आपने महर्षि दयानन्द व आर्य समाज के सिद्धांतो को आत्मसात करते हुए अन्तरजातिय वैदिक विवाह का ऐतिहासिक कार्य किया है आप महर्षि दयानन्द के सच्चे अनुयाई हैं।











