80 लाख की सफाई मशीन बनी कबाड़! नगर परिषद सवाई माधोपुर में सरकारी धन की बर्बादी पर उठे सवाल

राकेश अग्रवाल
सवाई माधोपुर। शहर की सड़कों की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर परिषद सवाई माधोपुर द्वारा खरीदी गई स्वीपिंग मशीन (सड़क सफाई मशीन) अब खुद बदहाली का शिकार होती नजर आ रही है। करीब 80 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2021-22 में खरीदी गई यह मशीन नगर परिषद परिसर में कबाड़ जैसी स्थिति में खड़ी दिखाई दे रही है।
शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई इस मशीन का वर्तमान में समुचित उपयोग नहीं होने से सरकारी धन के सदुपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय है कि आखिर इतनी महंगी मशीन खरीदने के बाद इसके रखरखाव और नियमित संचालन की जिम्मेदारी किसकी है?

सरकार बदली, मशीन की सुध लेने वाला कोई नहीं!
मशीन की मौजूदा स्थिति को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या नगर परिषद के पास इसके संचालन और रखरखाव की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? यदि मशीन खराब है तो उसे दुरुस्त करवाकर दोबारा उपयोग में क्यों नहीं लिया जा रहा? वहीं, यदि मशीन उपयोग के योग्य है तो उसे सफाई कार्य में क्यों नहीं लगाया जा रहा है?
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए
शहरवासियों के मन में सवाल है कि करीब 80 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई इस मशीन का अब तक कितना उपयोग हुआ और इसके रखरखाव पर कितना खर्च किया गया? क्या नगर परिषद ने मशीन की उपयोगिता और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है?
नगर परिषद प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही मशीन की वर्तमान हालत, उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी तथा सरकारी धन के उपयोग को लेकर जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि जनता के पैसे से खरीदे गए संसाधन यूं ही बर्बाद न हों।











