S.K. Stone फ्लाईओवर पर लोहे के पतरों से बढ़ा खतरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

मीरा-भाईंदर के S.K. Stone फ्लाईओवर पर सड़क के बीच लगाए गए लोहे के पतरों को लेकर एक बार फिर MMRDA की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि बीच सड़क लगाए गए ये लोहे के अवरोध वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इसे जल्द हटाने की मांग करते हुए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है।

वहीं दूसरी ओर, यदि MMRDA ने यातायात नियंत्रण, निर्माण कार्य की सुरक्षा अथवा दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की है तो उसके पीछे का तकनीकी आधार और सुरक्षा मानकों की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। केवल अवरोधक लगाने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती, बल्कि उनकी उचित डिजाइन, रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेत, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और यातायात विशेषज्ञों की सलाह का पालन भी उतना ही आवश्यक है। यदि इन पहलुओं की अनदेखी हुई है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा या समय रहते व्यवस्था की समीक्षा करेगा? विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा दोनों होना चाहिए, न कि नई परेशानियां खड़ी करना। इसलिए MMRDA को चाहिए कि वह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, यातायात पुलिस और नागरिकों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करते हुए स्थल का तत्काल निरीक्षण कराए और यदि खतरे की आशंका सही पाई जाए तो आवश्यक सुधारात्मक कदम बिना विलंब उठाए।














