गिरनार तीर्थ में शेर के हमले की दुखद घटना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग

Vikram B Rathod
गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध गिरनार तीर्थ में एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 11-12 वर्षीय बालक मयूर चौहान अपने परिवार के साथ गिरनार पर्वत की सीढ़ियों से तीर्थ यात्रा कर रहा था। इसी दौरान तड़के सुबह मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग 50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद उस पर एक शेर ने हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों एवं परिजनों के अनुसार शेर अचानक अंधेरे से निकलकर आया और पीछे से बालक पर हमला कर उसे पास के जंगल की ओर घसीट ले गया। घटना के बाद परिजनों तथा वन विभाग की टीम ने तत्काल खोजबीन शुरू की, लेकिन बाद में बालक के अवशेष पास की एक खाई से बरामद किए गए।
इस हृदयविदारक घटना के बाद वन विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से प्रभावित मार्ग को अस्थायी रूप से श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया तथा यात्रियों के आवागमन हेतु वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की। अधिकारियों ने घटना में शामिल होने की आशंका वाले एक शेर को पकड़ लिया है तथा क्षेत्र में अन्य शेरों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक माह के दौरान गिरनार क्षेत्र में शेर के हमले की यह छठी घटना बताई जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता का माहौल है।
गिरनार तीर्थ जैन, हिंदू एवं अन्य श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां भगवान नेमीनाथ का जैन मंदिर, अंबे माताजी मंदिर, दत्तात्रेय भगवान की पवित्र टोंक, जीवदया प्रेमी नेम-राजुल से जुड़े स्थल तथा अन्य अनेक दर्शनीय स्थान स्थित हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस तीर्थ की यात्रा करते हैं।
श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन को तीर्थ मार्ग के दोनों ओर मजबूत लोहे की एंगलयुक्त सुरक्षा जाली लगाने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था करने, वन्यजीव निगरानी बढ़ाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जैसे ठोस कदम तत्काल उठाने चाहिए। लंबे समय से इस क्षेत्र में शेरों एवं अन्य वन्य जीवों की आवाजाही बनी हुई है, इसलिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी एवं स्थायी सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। प्रशासन एवं वन विभाग को समन्वित रूप से कार्य करते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र और कठोर कदम उठाने चाहिए।











