सभी समस्याओं के अंत का एकमात्र स्थान मोक्ष है : जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी

Vikram B Rathod
मुण्डारा, 24 जून 2026।
जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वरजी की शुभ निश्रा में श्री शांतिनाथ श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ मुण्डारा द्वारा आयोजित रत्नत्रयी भक्ति महोत्सव के तीसरे दिन प्रातः 7:30 बजे अतीप्राचीन श्री शांतिनाथ जिनालय, श्री आदिनाथ जिनालय एवं श्री पार्श्वनाथ जिनालय में बड़े हर्षोल्लास के साथ ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर मुंबई सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत लगभग 500 मुण्डारावासी श्रद्धालु उपस्थित रहे। कई वर्षों के इतिहास में इस वर्ष ध्वजारोहण प्रसंग का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी ने कहा कि संसार में प्रत्येक कदम पर अनेक समस्याएँ मौजूद हैं। व्यक्ति सुबह से रात तक भोजन, व्यापार, प्रवास तथा अन्य सांसारिक कार्यों की समस्याओं को सुलझाने में लगा रहता है। एक समस्या समाप्त होती है तो दूसरी सामने आ जाती है। मनुष्य पूरी जिंदगी धन, पुत्र, पत्नी और परिवार के लिए कठिन परिश्रम करता, फिर भी समस्याओं का अंत नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं का वास्तविक अंत केवल मोक्ष में है। मोक्ष अवस्था में आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित रहती है, जहाँ न कर्मों का बंधन होता है और न ही शरीर का अस्तित्व। इसलिए वहाँ अनंत सुख और शांति की अनुभूति होती है।
जैनाचार्य श्री ने बताया कि मोक्ष पद की प्राप्ति के लिए तीर्थंकरों ने दान, शील, तप और भाव धर्म की आराधना का मार्ग बताया है। धर्म का प्रथम चरण दान धर्म है, जो दूसरों के सुख और कल्याण की भावना से किया जाता है। परोपकार और निःस्वार्थ सेवा की भावना ही आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में अग्रसर करती है।
आगामी विहार एवं कार्यक्रम
- 25 जून : बाली की ओर विहार
- 26 से 27 जून : सर्वोदय नगर, फालना में प्रवास
- 30 जून से 8 जुलाई : शिवगंज में स्थिरता
- 19 जुलाई : पिण्डवाड़ा में चातुर्मास प्रवेश
रत्नत्रयी भक्ति महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।











