लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी पहल करेगा नेशनल मीडिया प्रेस क्लब
राष्ट्रीय मीडिया आयोग के गठन, पत्रकार सुरक्षा कानून, सामाजिक सुरक्षा और पत्रकार उत्पीड़न पर प्रभावी कार्रवाई की मांग


कानपुर। लोकतंत्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्रकार समाज की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने, जनहित के मुद्दों को सामने लाने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद देश के अनेक पत्रकार आज भी सुरक्षा, आर्थिक अस्थिरता, स्वास्थ्य सुविधाओं, बीमा, पेंशन, पत्रकार उत्पीड़न और कानूनी सहायता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने के उद्देश्य से नेशनल मीडिया प्रेस क्लब पत्रकारों के अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण के लिए संगठित एवं संवैधानिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एम. डी. शर्मा के नेतृत्व में नेशनल मीडिया प्रेस क्लब के देश के 22 राज्यों में कार्यरत होने की जानकारी संगठन की ओर से दी गई है। संगठन का उद्देश्य पत्रकारों, संपादकों, प्रकाशकों और मीडिया संस्थानों से जुड़े लोगों की समस्याओं को साझा मंच प्रदान करना, पत्रकारिता के मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोकतांत्रिक और वैधानिक माध्यमों से संबंधित मांगों को सरकार एवं सक्षम संस्थाओं तक पहुंचाना है।
*पत्रकारों की समस्याओं का समाधान समय की आवश्यकता*
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब का मानना है कि मीडिया संस्थानों की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, विश्वसनीयता, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण को भी मजबूत बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से छोटे समाचार पत्रों, स्थानीय संवाददाताओं, स्वतंत्र पत्रकारों और सीमित संसाधनों में काम करने वाले मीडिया कर्मियों के सामने आर्थिक एवं व्यावसायिक चुनौतियां रहती हैं। कई बार समाचार संकलन के दौरान दबाव, धमकी, हिंसा अथवा उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आती हैं।
संगठन की मांग है कि पत्रकारिता से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। यदि किसी पत्रकार के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के प्रमाण मिलते हैं, तो मामले की विधिसम्मत जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। जहां जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मामला निराधार पाया जाए, वहां कानून के अनुरूप कार्यवाही समाप्त करने अथवा मुकदमे के निरस्तीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय उचित निर्णय ले। साथ ही, वास्तविक अपराध की जांच में पत्रकार होने के आधार पर किसी को अनुचित संरक्षण भी नहीं मिलना चाहिए। संगठन का जोर निष्पक्षता, विधि के शासन और न्यायपूर्ण प्रक्रिया पर है।
*राष्ट्रीय मीडिया आयोग और पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग*
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय मीडिया आयोग के गठन की व्यवहार्यता पर गंभीर विचार, पत्रकार सुरक्षा विधेयक के माध्यम से प्रभावी कानूनी संरक्षण की दिशा में पहल तथा पत्रकारों की शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेह व्यवस्था शामिल हैं।
संगठन चाहता है कि राष्ट्रीय मीडिया आयोग के संभावित स्वरूप, अधिकार-क्षेत्र, जिम्मेदारियों और स्वतंत्रता पर पत्रकार संगठनों, संपादकों, प्रकाशकों, मीडिया संस्थानों, विधि विशेषज्ञों तथा अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श कराया जाए। प्रस्तावित आयोग पत्रकारिता की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया संस्थानों की समस्याओं और पत्रकारों के सामाजिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर अध्ययन कर नीतिगत सुझाव देने में उपयोगी भूमिका निभा सकता है।
इसी प्रकार, पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता पर विचार करते हुए ऐसी प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे रिपोर्टिंग के कारण होने वाली हिंसा, धमकी और उत्पीड़न के मामलों में शिकायत दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने तथा कानून के अनुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने में सहायता मिले। प्रस्तावित व्यवस्था में पत्रकारों के अधिकारों के साथ उनकी जिम्मेदारियों और कानून के संभावित दुरुपयोग से बचाव के उपायों को भी स्थान मिलना चाहिए।
*पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा, बीमा, स्वास्थ्य सुविधा और पेंशन मिले*
संगठन का कहना है कि पत्रकारिता से जुड़े जोखिमों को देखते हुए पात्र पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए सुलभ स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, जीवन सुरक्षा और दीर्घकालीन सामाजिक सुरक्षा की व्यावहारिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। आर्थिक संकट, गंभीर बीमारी, दुर्घटना अथवा असामयिक मृत्यु की स्थिति में पत्रकार परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता की समीक्षा भी जरूरी है।
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब की मांग है कि पात्रता, वित्तपोषण और उपचार संबंधी स्पष्ट नियमों के साथ पत्रकार स्वास्थ्य बीमा कार्ड की व्यवहार्यता पर विचार किया जाए। पात्र पत्रकारों के लिए पेंशन अथवा अन्य दीर्घकालीन सामाजिक सुरक्षा विकल्पों पर भी व्यापक अध्ययन कराया जाए, ताकि पत्रकारिता में वर्षों तक जनहित के लिए कार्य करने वाले लोगों को वृद्धावस्था और आर्थिक संकट के समय सहायता मिल सके।
*भारतीय प्रेस परिषद के अधिकार-क्षेत्र और संस्थागत व्यवस्था पर पुनर्विचार*
भारतीय प्रेस परिषद एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है, जिसकी महत्वपूर्ण भूमिका प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा तथा समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के पत्रकारिता मानकों को बनाए रखने और सुधारने से जुड़ी है। हालांकि, पत्रकारों की सभी सुरक्षा, स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन और व्यापक कल्याण संबंधी समस्याएं उसके वर्तमान अधिकार-क्षेत्र में नहीं आतीं।
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब का मत है कि भारतीय प्रेस परिषद की भूमिका, उपलब्ध संसाधनों और अधिकार-क्षेत्र की समीक्षा की जानी चाहिए। आवश्यकता और कानूनी व्यवहार्यता के अनुसार उसके अधिकारों एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाने पर विचार हो। साथ ही, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित की जाए। इस दिशा में कोई भी परिवर्तन विधायी प्रक्रिया, प्रेस की स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता का सम्मान करते हुए किया जाना चाहिए।
*सरकारी विज्ञापन नीति में पारदर्शिता और छोटे समाचार पत्रों को निष्पक्ष अवसर*
छोटे एवं क्षेत्रीय समाचार पत्र स्थानीय जनसमस्याओं को सामने लाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सीमित संसाधन, बढ़ती लागत, वितरण की कठिनाइयां और विज्ञापन आय में अनिश्चितता इनके सामने गंभीर चुनौतियां पैदा करती हैं।
संगठन की मांग है कि सरकारी विज्ञापन नीति में स्पष्ट पात्रता मानदंड, पारदर्शी प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। पात्र समाचार पत्रों एवं मीडिया संस्थानों के साथ नियमों के अनुसार निष्पक्ष व्यवहार हो तथा विज्ञापन आवंटन में मनमानी या भेदभाव की शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। छोटे मीडिया संस्थानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और डिजिटल परिवर्तन के अवसर प्रदान करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
*पत्रकारिता के मानक, संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारियां*
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब पत्रकारों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों को भी महत्वपूर्ण मानता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है। न्यायिक व्याख्या के अनुसार प्रेस की स्वतंत्रता भी इसी अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। हालांकि, यह स्वतंत्रता अनुच्छेद 19(2) में निर्धारित युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है।
संगठन का कहना है कि समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन, संबंधित पक्ष का दृष्टिकोण लेने का प्रयास, निजता का सम्मान, मानहानि संबंधी कानूनों का पालन और अपुष्ट सूचनाओं से बचाव आवश्यक है। किसी व्यक्ति पर आरोप लगाते समय प्रमाणों और भाषा के प्रति विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। पत्रकारिता का उद्देश्य जनहित में तथ्यों को सामने लाना है, न कि व्यक्तिगत प्रतिशोध, अफवाह या बिना प्रमाण किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना।
पत्रकारों को यह भी समझना चाहिए कि प्रेस कार्ड, संगठन की सदस्यता या किसी संस्थान का परिचय-पत्र अपने आप सरकारी मान्यता अथवा किसी विशेष सरकारी योजना की पात्रता प्रदान नहीं करता। प्रत्येक योजना और मान्यता के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निर्वहन ही पत्रकारिता की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
*मतभेद भुलाकर साझा मुद्दों पर एकजुट हों पत्रकार*
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब सभी पत्रकारों, संपादकों, प्रकाशकों, समाचार पत्र संचालकों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और पत्रकार संगठनों से अपील करता है कि वे व्यक्तिगत मतभेदों, संगठनात्मक प्रतिस्पर्धा और माध्यमों के आधार पर होने वाले विभाजन से ऊपर उठकर साझा समस्याओं के समाधान के लिए एक मंच पर संवाद करें।
संगठन का संदेश है कि एकजुटता का अर्थ सभी विचारों का समान होना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक संरक्षण जैसे साझा मुद्दों पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से साथ खड़ा होना है। ज्ञापन, संवाद, जनजागरूकता अभियान, विधिक परामर्श और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक कार्यक्रमों के माध्यम से पत्रकारों की मांगों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करने की पहल
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब ने पत्रकारों की समस्याओं और प्रमुख मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए संगठित अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। संगठन की प्रस्तावित पहल का उद्देश्य भारत सरकार तथा संबंधित सक्षम संस्थाओं का ध्यान राष्ट्रीय मीडिया आयोग, पत्रकार सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, पेंशन, पत्रकार उत्पीड़न, फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच और सरकारी विज्ञापन नीति में पारदर्शिता जैसे विषयों की ओर आकर्षित करना है।
संगठन की ओर से कहा गया है कि पत्रकारों की मांगों को लेकर किसी भी आंदोलन का स्वरूप शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और कानूनसम्मत होना चाहिए। इसके अंतर्गत पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों से संवाद, मांग-पत्र, ज्ञापन और अन्य वैधानिक माध्यम अपनाए जा सकते हैं। उद्देश्य किसी सरकार या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि पत्रकारिता से जुड़े राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर नीतिगत समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एम. डी. शर्मा के नेतृत्व में नेशनल मीडिया प्रेस क्लब का आह्वान है कि पत्रकार अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनें, पत्रकारिता के मानकों का पालन करें और साझा समस्याओं के समाधान के लिए संगठित आवाज उठाएं। संगठन के अनुसार, जब पत्रकारिता स्वतंत्र, जिम्मेदार और सुरक्षित होगी, तभी जनहित की आवाज अधिक प्रभावी ढंग से शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अधिक सशक्त बन सकेगा।
✍️एम डी शर्मा – राष्ट्रीय अध्यक्ष
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब



