चारधाम यात्रा हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न, श्रद्धालुओं का हुआ भव्य स्वागत

Vikram B Rathod
भायंदर (मुंबई)। भायंदर मुंबई निवासी ऋषभ विक्रम राठौड़ (बाली) एवं जेनम वसंत पुनमिया (रोलड़ां) ने देवभूमि उत्तराखंड स्थित पवित्र छोटा चारधाम यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण कर अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के दर्शन कर मन अत्यंत प्रफुल्लित हुआ तथा श्रद्धा, संतोष और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
चारधाम यात्रा के अंतर्गत उन्होंने रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम, चमोली जिले में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम, उत्तरकाशी जिले में मां गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री धाम तथा यमुना नदी के उद्गम स्थल यमुनोत्री धाम के दर्शन किए।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को भारी बारिश, हिमपात, भूस्खलन तथा कठिन पर्वतीय मार्गों जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार मौसम खराब होने के कारण यात्रा मार्ग बंद भी हुए, लेकिन श्रद्धालुओं ने उत्साह और आस्था के साथ यात्रा जारी रखी। यात्रा के दौरान “भोले की फौज करेगी मौज” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम तक गौरीकुंड से लगभग 16 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसे पूरा करने में 8 से 10 घंटे का समय लगता है, जबकि दर्शन के लिए भी कई घंटों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के पश्चात भगवान शिव ने यहीं पांडवों को दर्शन दिए थे। केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा करवाया गया था तथा बाद में आदि शंकराचार्य ने इसका पुनर्निर्माण कराया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि केदारनाथ धाम के कपाट प्रतिवर्ष लगभग छह माह के लिए खुलते हैं। कपाट अप्रैल-मई में खुलते हैं तथा दीपावली के बाद भाईदूज पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
यात्रा पूर्ण कर लौटने पर माता-पिता, परिजनों, मित्रों एवं बिल्डिंग के सहनिवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। पगड़ी पहनाकर, फूल-मालाओं से सम्मानित कर तथा आतिशबाजी के साथ उनका अभिनंदन किया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार दूध से चरण पखारकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर पूरा वातावरण शिवमय एवं भक्तिमय हो उठा।











