भायंदर में ओली की तपस्या का हर्षोल्लास के साथ समापन, 130 आराधकों ने की आराधना

Vikram B Rathod
भायंदर, महाराष्ट्र। जैन धर्म में तप, त्याग, संयम और आराधना का विशेष महत्व है। इसी धार्मिक परंपरा को निभाते हुए भायंदर स्थित 150 फीट रोड पर वालचंद दर्शन भगवान महावीर स्वामी जिनालय के प्रांगण में आयोजित ओली की तपस्या का समापन 27 अक्टूबर 2026 को हर्षोल्लास एवं धार्मिक उत्साह के साथ हुआ। इस धार्मिक आयोजन में कुल 130 आराधकों ने ओली की कठिन तपस्या की और धर्म के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा एवं समर्पण का परिचय दिया।
ओली की आराधना 18 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हुई थी। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान का पारणा 27 अक्टूबर को संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे आयोजन में धार्मिक वातावरण, सेवा भावना और समाज के लोगों का सहयोग देखने को मिला।
कठिन नियमों के साथ की ओली की तपस्या
जैन धर्म में ओली की तपस्या को संयम, अनुशासन और आत्मशुद्धि की महत्वपूर्ण आराधना माना जाता है। इस तपस्या के दौरान आराधकों को खानपान के विशेष नियमों का पालन करना होता है। तपस्या में बिना तेल, मसाले और घी के सादा भोजन ग्रहण किया जाता है। भोजन में नमक का भी प्रयोग नहीं किया जाता तथा निर्धारित नियमों के अनुसार उबला हुआ भोजन ग्रहण किया जाता है।
ऐसे कठिन नियमों का पालन करते हुए 130 आराधकों ने ओली की तपस्या पूर्ण की। तपस्या के दौरान पड़ रही तेज गर्मी के बीच भी आराधकों ने अपने धार्मिक संकल्प और संयम को बनाए रखा। आराधकों की यह साधना धर्म के प्रति उनकी निष्ठा, धैर्य और समर्पण को दर्शाती है।
पारणे के अवसर पर दिखा उत्साह, लाभार्थी परिवारों ने निभाई सेवा
ओली की तपस्या पूर्ण होने के बाद 27 अक्टूबर को पारणे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्वियों के पारणे के लाभार्थियों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
पारणा कराने के लाभार्थियों में शकुंतला बेन जावंतराजजी राठौड़, पदमा राजेंद्र राठौड़, तरुणा सुरेंद्र राठौड़, वर्षा नवनीत राठौड़, अनु करणजी पुनमिया, मोक्षा अलयजी शाह और नयना रोमीलजी बाफना का सहयोग रहा।

लाभार्थी परिवारों की सेवा भावना ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। जैन समाज में तपस्वियों की सेवा और उनके पारणे में सहयोग करना धार्मिक भावना एवं सामाजिक सहभागिता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ट्रस्टियों और सोसायटी कमेटी का मिला भरपूर सहयोग
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में भगवान महावीर स्वामी जैन मंदिर के ट्रस्टीगण तथा वालचंद दर्शन सोसायटी कमेटी के सदस्यों का भरपूर सहयोग रहा। सभी के सामूहिक प्रयासों से आयोजन धार्मिक उत्साह और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों ने तपस्वियों के प्रति सम्मान एवं सेवा भावना प्रदर्शित की। ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में आपसी सहयोग, एकता और धर्म के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।
बाली-भायंदर जैन मित्र मंडल की रही सहभागिता
इस अवसर पर बाली-भायंदर जैन मित्र मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भी सहयोग रहा।
मंडल के अध्यक्ष डॉ. रणवीरजी गेमावत, जो नाकोड़ा तीर्थ के पूर्व ट्रस्टी भी रह चुके हैं, का उल्लेखनीय योगदान रहा। मंडल के सचिव विक्रम राठौड़ तथा कोषाध्यक्ष प्रकाशजी कितावत ने भी आयोजन में सहभागिता निभाई।
इसके अतिरिक्त मुकेश सिरोया, मुकेश परमार, मनोज कोटारी, राजेंद्र राठौड़, प्रदीप भंडारी और वीरेंद्र गेमावत सहित अन्य सहयोगियों की सहभागिता रही।
सभी सहयोगियों और समाजजनों के सामूहिक प्रयासों से ओली की तपस्या का समापन धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
तप, त्याग और संयम का संदेश दे गई ओली की आराधना
जैन धर्म की धार्मिक परंपराओं में तपस्या को आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का माध्यम माना जाता है। ओली की आराधना के दौरान कठिन खानपान नियमों का पालन करना साधकों के लिए अनुशासन और धैर्य की परीक्षा होती है।
भायंदर में 130 आराधकों द्वारा की गई इस तपस्या ने धर्म के प्रति श्रद्धा, संयम और समर्पण का संदेश दिया। आयोजन के सफल समापन पर लाभार्थी परिवारों, मंदिर ट्रस्टियों, सोसायटी कमेटी के सदस्यों तथा बाली-भायंदर जैन मित्र मंडल के सहयोग की सराहना की गई।
इस प्रकार वालचंद दर्शन भगवान महावीर स्वामी जिनालय के प्रांगण में आयोजित ओली की तपस्या का पारणा 27 अक्टूबर 2026 को धार्मिक उल्लास, सेवा भावना और समाज की सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।











